छत्तीसगढ़

आत्मा-परमात्मा के एकाकार से पांचों इंद्रियां वश में हो जाती हैं : साध्वी सिद्धांतनिधि

रायपुर । शुक्रवार को `टच-टू-ट्रांसफर` शिविर के दूसरे दिन साध्वी सिद्धांतनिधि ने कहा कि, जब आत्मा का परमात्मा से तादाम्य सम्बन्ध स्थापित हो जाता है, तब आत्मा-परमात्मा का एकाकार हो जाता है। तभी मनुष्य की पांचों इंद्रियां भी उसके वश में हो जाती हैं। यदि पांचों इंद्रियों को आपने अपने वश में कर लिया तो परमात्मा आपके वश में हो जाएंगे। इस विशेष शिविर के ऐसे ही प्रेरणास्पद विषयों पर साध्वी रत्ननिधि ने भी सुस्पष्ट भावार्थ कर श्रद्धालुओं की जिज्ञासाओं का समाधान किया।
साध्वी ने कहा कि, परमात्मा के मंदिर में प्रवेश करने से लेकर दर्शन-वंदन और गमन तक हमारे मन, वचन, काया में शुद्धता रहनी आवश्यक है। प्रभु परमात्मा के दर्शन, वंदन-पूजन के समय सात प्रकार की शुद्धियां होना ज्ञानीजनों ने बताई हैं, इसी महत्वपूर्ण विषय के क्रम को बढ़ाते हुए साध्वी ने कहा कि, उन शुद्धियों में अंग शुद्धि, वस्त्र शुद्धि, भूमि शुद्धि, उपकरण शुद्धि, द्रव्य शुद्धि और विधि शुद्धि प्रमुख हैं। प्रथम अंग शुद्धि वह है, जिसमें हमारे शरीर के बाहरी स्वरूप में कोई अशुद्धि नहीं होनी चाहिए, मनुष्य शरीर रक्त, पीप, मवाद आदि कितनी ही अशुद्धियों से भरा हुआ है। शरीर में कोई घाव हो और वह ठीक न हुआ हो उससे मवाद बाहर आ रहा हो तो ऐसे व्यक्ति को द्रव्य पूजा करना निषेध बताया गया है। वहीं यदि घाव में पस भरा हुआ है और वह बाहर नहीं निकल रहा है तब तक ऐसा व्यक्ति पूजा कर सकता है। अंग शुद्ध के लिए जीवदया का पालन करते हुए सूर्योदय के पूर्व स्नान करने कहा गया है। वहीं सूर्यास्त के बाद स्नान करने पर सात गांवों को जलाने के बराबर पाप कर्म का बंध होना बताया गया है। इसीलिए स्नान करने में विधान को अनिवार्य रूप से अपनाया जाना चाहिए।
00 लघुनाटिका `चंदनबाला` का मंचन 29 को
ऋषभदेव जैन मंदिर के अध्यक्ष तिलोकचंद बरडिय़ा ने कहा कि, साध्वी रत्ननिधि आदि ठाणा-3 की निश्रा में तीन दिवसीय चंदनबाला के तेला तप का शुक्रवार को द्वितीय दिवस रहा, जिसमें अनेक श्रद्धालुओं ने आज बेले का प्रत्याख्यान ग्रहण किया। वहीं 29 अक्टूबर को जैन मंदिर, सदरबाजार के आराधना हॉल में शाम 7.30 बजे से जीवन दर्शन और तत्व ज्ञान पर आधारित लघुनाटिका `चंदनबाला` का मंचन किया जाएगा।

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