छत्तीसगढ़

इस तहसील कार्यालय में खुले आसमान का आनंद मिलता है

अम्बिकापुर। प्राकृतिक आपदा से बचाने वाला और आपदा में हुए नुकसान का हिसाब रखने वाला कार्यालय खुद आपदा की मार झेल रहा है। क्योंकि सरगुजा जिले के धौरपुर तहसील कार्यालय में मौजूद दस्तावेजों, कंप्यूटर को पन्नी से ढक कर बारिश के पानी से बचाया जा रहा है।

दरअसल, तहसील कार्यालय निर्माण एजेंसी के भ्रष्टाचारों का दंश अपनी बदनसीबी के रूप में झेल रहा है कि राजस्व रिकॉर्ड, कंप्यूटर और 12 लाख कीमत के प्रिंटर को पन्नी से ढककर बचाया जा रहा है। जिसकी तस्वीरें सब कुछ बयां कर रही हैं।

धौरपुर का तहसील कार्यालय तालाब में तब्दील हो चुका है। जो घटिया निर्माण कार्य का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

दरअसल, कार्यालय की छत टपकती ही नहीं, बल्की ऐसा लगता है कि जैसे खुले आसमान के नीचे कार्यालय लगा हो और बारिश आने के बाद कीमती दस्तावेज और मशीनों को तिरपाल से ढक दिया गया हो। वहीं कार्यालय में पदस्थ स्टाफ भी क्या करे, काम करना उनकी मजबूरी है। वरना शोकाज नोटिस और उसके बाद दिखावे की कार्रवाई का डंडा जो इन पर चल सकता है। लिहाजा बिना हो हल्ला किए ये बेचारे अपनी ड्यूटी बजाते रहते हैं।

विश्वसनीय छत्तीसगढ़ का नारा देने वाले सूबे के मुखिया ने अपना तेरह वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया है और इस तेरह वर्ष को विकास के नाम समर्पित भी किया जाता है। लेकिन सरगुजा में विकास के मायने ही कुछ और हैं। यहां विकास के मायने हैं भ्रष्टाचार, यहां बेरोजगारों को एक नया रोजगार मिला हुआ है और इस रोजगार के तहत ये पहले राजनीति में प्रवेश करते हैं। फिर ठेकेदार बन जाते हैं और फिर घटिया निर्माण कर अपनी बेरोजगारी दूर करते हैं। इस तरह सरगुजा में पुल, पुलिया और भवनों के जर्जर होने की इबारत लिखी जा रही है।

बात सिर्फ धौरपुर तहसील भवन की ही नहीं है। पिछले साल बारिश की वजह से इस क्षेत्र में सैकड़ों पुल-पुलिया बह गए। संभाग मुख्यालय के मेडिकल कॉलेज के वार्ड से लेकर स्कूल भवन और न जाने कितने कार्यालयों की यही दशा है। हाल ही में अस्पताल में छाता लेकर बैठे डॉक्टरों को देखकर क्षेत्रीय विधायक चिंतामणि महराज को अस्पताल के बाहर तिरपाल लगाकर एडमिट होना पड़ा था। यानि की एक दो नहीं बल्की सम्पूर्ण सरगुजा में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता स्तरहीन है और विभाग के मंत्री भी गहरी नींद में सोए हुए हैं।

बहरहाल, रमन सरकार और उनके मंत्रियों ने तेरह वर्षों में विकास के बड़े दावे किए हैं। जाहिर है कि क्षेत्र में निर्माण कार्यों और विकास की तेज गति दिखती है। लेकिन कमीशन खोरी के इस खेल में निर्मण की गुणवत्ता को तार-तार कर दिया गया है और नतीजा यह है कि कहीं डॉक्टर छाता लेकर अपनी कुर्सी पर बैठते हैं, तो कहीं राजस्व अभिलेखों को तिरपाल से ढका जाता है और जिम्मेदार या तो जांच के बाद कार्रवाई या फिर जल्द सुधारने की बात कहते हैं।

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