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बाढ़: काजीरंगा नेशनल पार्क में जानवरों पर जान का खतरा, भरा पानी

राजधानी गुवाहाटी में सोमवार से दो हफ्ते के लिए पूर्ण लॉकडाउन

राजधानी गुवाहाटी में सोमवार से दो हफ्ते के लिए पूर्ण लॉकडाउन

कोरोना पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने राजधानी गुवाहाटी में सोमवार से दो हफ्ते के लिए पूर्ण लॉकडाउन शुरू किया है। कोरोना और बाढ़ की दोहरी मार से सरकार के साथ आम लोग भी हलकान हो रहे हैं। राज्य में कोरोना से अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है। बीते कुछ दिनों में लगातार बारिश की वजह से त्रिपुरा के अलावा अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और मिजोरम के ज्यादातर निचले हिस्से भी पानी में डूब गए हैं। लेकिन कोरोना की मार सबसे ज्यादा होने की वजह से असम में बाढ़ ने हालात जटिल बना दिया है।

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण

असम में दूसरे दौर की बाढ़ ने राज्य के 23 जिलों को अपनी चपेट में ले लिया है। इससे अब तक 23 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों परिवार बेघर हो गए हैं। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के आंकड़ों के मुताबिक असम के 33 में से 23 जिलों को दो हजार से ज्यादा गांवों के 9.26 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं। बराक घाटी की नदियों को छोड़ कर ब्रह्मपुत्र समेत तमाम नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। सबसे प्रभावित जिलों में धेमाजी, लखीमपुर, उदालगुड़ी, नलबाड़ी, बरपेटा, बंगाईगांव, कोकराझाड़, साउथ सालमारा, ग्वालपाड़ा, कामरूप, डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिले शामिल हैं।

मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल

मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने एक उच्च-स्तरीय बैठक में परिस्थिति की समीक्षा करने के बाद तमाम उपायुक्तों को कोरोना से बचने के उपायों का पालन करते हुए बाढ़-पीड़ितों की हर संभव सहायता करने का निर्देश दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मुख्यमंत्री से फोन पर बाढ़ की हालत की जानकारी ली है और केंद्र की ओर से हर संभव सहायता मुहैया कराने का भरोसा दिया है।

अवैध शिकारियों की गतिविधियों पर निगरानी

वन विभाग के सूत्रों का कहना है कि एक सींग वाले गैंडों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर काजीरंगा नेशनल पार्क के निचले इलाकों में भी बाढ़ का पानी भर गया है। इससे अवैध शिकारियों की गतिविधियों पर निगरानी के लिए बने कुछ वॉच टावर डूब या ढह गए हैं। लेकिन बाढ़ से अब तक किसी जानवर के मरने की सूचना नहीं मिली है। तमाम जानवर ऊंची जगहों पर चले गए हैं।

सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना सबसे बड़ी समस्या

आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के एक अधिकारी ने बताया, “ब्रह्मपुत्र नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है और 30 जून की सुबह तक इसके जलस्तर में और 25 सेंटीमीटर की वृद्धि का अंदेशा है। बाढ़ से ज्यादातर मौतें तेज बहाव में डूबने, जमीन धंसने या घरों के नीचे दब जाने की वजह से हुई हैं।” सबसे ज्यादा प्रभावित 12 जिलों में बने 193 राहत शिविरों में 27 हजार से ज्यादा लोगों ने शरण ले रखी है। लेकिन इन शिविरों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना सबसे बड़ी समस्या है। आपदा प्रबंधन विभाग के सूत्रों ने बताया कि कम जगह में ज्यादा लोगों के शरण लेने की वजह से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना एक चुनौती बन गया। फिलहाल लोगों की जान बचाना और उनको खाना व दवाएं मुहैया कराना ही सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

कामरूप जिले में पूर्ण लॉकडाउन लागू

बाढ़ की वजह से विभिन्न जिलों में 68,806 हेक्टेयर में खड़ी फसलों के साथ ही सड़कों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों पर बने तटबंधों को नुकसान पहुंचा है और कई छोटे और मझौले पुल पानी में बह गए हैं।

राज्य में कोरोना का कहर भी लगातार बढ़ रहा है। हालात पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने सोमवार से दो सप्ताह तक कामरूप जिले में पूर्ण लॉकडाउन लागू कर दिया है। राजधानी गुवाहाटी इसी जिले के तहत है। इस दौरान सिर्फ दवा की और दूसरी जरूरी वस्तुओं की दुकानें खुली रहेंगी। बीते कुछ दिनों में राज्य में संक्रमण तेजी से बढ़ा है और मरीजों की तादाद सात हजार से ऊपर पहुंच गई है। कोरोना से अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है। एसपी स्तर के एक अधिकारी समेत 31 पुलिसवाले भी संक्रमित हो गए हैं।

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