ज्योतिष

परीक्षा में सफल होने के लिए अपनाएं ये आसान वास्तु टिप्स

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव कुंडली विशेषज्ञ और प्रश्न शास्त्री 8178677715, 9811598848

स्कूल का छात्र हों या कालेज का छात्र परीक्षा की बात आते ही उसके हाथ पैर फूलने लगते है। हर एक छात्र की यह इच्छा रहती हैं कि उसे अधिक से अधिक अंक प्राप्त हों। कुछ इसी तरह की इच्छाएं प्रत्येक माता-पिता की भी रहती हैं।

परीक्षा का नाम जब इतनी घबराहट देता हैं तो निश्चित रुप से इसकी तैयारी करने में बहुत मेहनत करनी पड़ती है। सामान्यत: देखा गया है कि बहुत मेहनत करने पर भी मनोनूकुल परिणाम प्राप्त नहीं होते है।

यदि यही स्थिति आपके बच्चों के साथ भी रहती हैं तो आपके लिए यह आलेख उपयोगी साबित हो साक्ता है। आज इस आलेख में हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताने जा रहे हैं जिन्हें उपयोग में लाकर आप अपने बच्चों को अच्छे नंबर लाने में सहयोग कर सकते हैं –

अध्ययन के कमरे की दिशा

वास्तु शास्त्र कहता है कि अध्ययन का कमरे सदैव ही उत्तर-पश्चिम दिशा में होना चाहिए। पढ़ाई करते समय बच्चों का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। इससे पढ़ाई में ध्यान बनाए रखने में सहयोग प्राप्त होता है। पढ़ी हुई विषय वस्तु बच्चों को जल्द याद रहती हैं, और याद की हुई वस्तुएं याद भी रहती है। छात्र परीक्षा के समय नर्वस नहीं होता है, इससे बच्चों के नंबर अच्छे प्राप्त होते हैं।

अध्ययन करने का सही तरीका

अध्ययन करने के लिए सही दिशा और स्थिति का होना आवश्यक है। वास्तु शास्त्र यह कहता है कि छात्र पढ़ाई करते समय कुर्सी पर एक दम अलर्ट होकर बैठे। आराम लेकर बैठने से ध्यान भंग होने की संभावनाएं अधिक रहती है। यह

माना जाता है कि जब पीठ का मेरुरज्जू का सीधा होना अध्ययन में उपयोगी साबित होता है। इससे स्मरणशक्ति बेहतर होती है। यह ध्यान रखना चाहिए कि कभी भी बच्चों को झुककर या लेटकर पढ़ने की आदत ना डालें।

प्रेरक चित्र लगाएं

छात्रों के कमरे में प्रेरणात्मक व सकारात्मक वस्तुएं, फोटो या प्रतिमाएं रखनी चाहिए। अध्ययन के कमरे को सकारात्मक बनाए रखने के लिए विद्या की देवी सरस्वती एवं शुभता के प्रतीक गणेश जी का पोस्टर लगाना शुभ रहता है। इसके अलावा पढ़ाई के कमरे में प्रकृति से जुड़े चित्र लगाना भी शुभ रहता है।

अध्ययन के कमरे में विश्व प्रसिद्ध शिक्षकों और विद्वान व्यक्तियों के चित्र लगाना भी अच्छा माना जाता है। सकारात्मक विचारों से युक्त पोस्टर भी लगाएं जा सकते हैं। इससे एकाग्रता बढ़ती है अध्ययन में मन अधिक लगता है।

अध्ययन का निर्धारित समय

किसी भी परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक हैं कि पढ़ाई का समय नियमित किया जाए। एक समय तालिका बनाकर प्रतिदिन के हिसाब से अलग-अलग विषयों के लिए समय सारणी बनाए जाए। प्रत्येक विषय को समय देना आवश्यक है।

परीक्षा की तैयारी करने से पूर्व यदि यह निर्धारित कर लिया जाए, कि दिन और रात्रि में कुल कितने समय पढ़ाई करनी हैं और कितना समय अन्य विषयों को देना हैं , तो इससे सभी विषयों को बराबर समय दिया जा सकता है। समय सारणी का निर्माण करने के साथ साथ इसका पालन करना भी जरुरी है।

अध्ययन मेज पर पिरामिड़, ग्लोब, एजुकेशन टावर रखना शुभ माना जाता है। अध्ययन करने से पूर्व देवी सरस्वती को प्रणाम करना चाहिए, संभव हों तो इनका मंत्र जाप भी करना चाहिए और ग्लोब को घूमाना चाहिए। इससे छात्र का पढ़ाई में मन लगता है।

जिस रुम में छात्र पढ़ाई कर रहा हो उस कमरे में शौचालय कभी नहीं रखना चाहिए। अध्ययन की मेज पूर्व- उत्तर ईशान कोण या पश्चिम दिशा में होनी चाहिए। दक्षिण या आग्नेय अथवा उत्तर-दक्षिण में कभी भी नहीं होनी चाहिए।

जहां छात्र अध्ययन करें, उस कमरे में एक खिड़की और रोशनदान भी अवश्य लगाना चाहिए। अध्ययन कक्ष की द्वार की दिशा पूर्व-उत्तर, मध्य या पश्चिम में होनी चाहिए। अध्ययन कक्ष की उत्तर दिशा में पुस्तकों की अलमारी रखनी चाहिए।

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव कुंडली विशेषज्ञ और प्रश्न शास्त्री
8178677715, 9811598848

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव पिछले 15 वर्षों से सटीक ज्योतिषीय फलादेश और घटना काल निर्धारण करने में महारत रखती है. कई प्रसिद्ध वेबसाईटस के लिए रेखा ज्योतिष परामर्श कार्य कर चुकी हैं।

आचार्या रेखा एक बेहतरीन लेखिका भी हैं। इनके लिखे लेख कई बड़ी वेबसाईट, ई पत्रिकाओं और विश्व की सबसे चर्चित ज्योतिषीय पत्रिकाओं में शोधारित लेख एवं भविष्यकथन के कॉलम नियमित रुप से प्रकाशित होते रहते हैं।

जीवन की स्थिति, आय, करियर, नौकरी, प्रेम जीवन, वैवाहिक जीवन, व्यापार, विदेशी यात्रा, ऋण और शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, धन, बच्चे, शिक्षा, विवाह, कानूनी विवाद, धार्मिक मान्यताओं और सर्जरी सहित जीवन के विभिन्न पहलुओं को फलादेश के माध्यम से हल करने में विशेषज्ञता रखती हैं।

Tags
Back to top button