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संध्या के समय चंद्रदेव का 16 चीजों से पूजन करें

भाद्रपद शुक्ल द्वितीय पर चंद्र दर्शन पर्व मनाया जाएगा। शास्त्रों ने चंद्रमा को सोम, सुधाकर व सुधांशु कहा है। सुधा का अर्थ है अमृत। पृथ्वी पर अगर अमृत है तो वह जल ही है।

पौराणिक मतानुसार ऋषि अत्रि व अनुसूया के पुत्र चंद्र का विवाह दक्ष प्रजापति की सत्ताईस पुत्रियों से हुआ था। इन्हीं चंद्र पत्नियों के नाम पर सत्ताईस नक्षत्रों के नाम पड़े हैं। चंद्र 16 कलाओं यानि 6 तिथियों से युक्त हैं।

द्वितीया चंद्रमा की दूसरी कला है। इस कला का अमृत कृष्णपक्ष में स्वयं सूर्य पी कर स्वयं को ऊर्जावान रखते हैं व शुक्ल पक्ष में पुनः चंद्रमा को लौटा देते हैं। हर माह अमावस्या के बाद जब पहली बार चंद्रमा आकाश पर दिखता है उसे चंद्र दर्शन कहते हैं।

शास्त्रनुसार इस समय चंद्र दर्शन अत्यंत फलदायक होता है। कुंडली में अशुभ चंद्रमा होने से डिप्रेशन, गृह कलेश, धन हानि की सम्भावना रहती है। सावन दूज पर चंद्र दर्शन और विधिवत चंद्रदेव के पूजन से डिप्रेशन से मुक्ति मिलती है, शादीशुदा जीवन में प्यार बढ़ता है और गृह कलेश से मुक्ति मिलती है।

स्पेशल पूजन विधि: संध्या के समय चंद्रदेव का 16 चीजों से पूजन करें। गौघृत का दीपक करें, कपूर जलाकर धूप करें, सफ़ेद फूल, चंदन, चावल व इत्र चढ़ाएं, खीर का भोग लगाएं व पंचामृत से चंद्रमा को अर्घ्य दे तथा सफ़ेद चंदन की माला से 108 बार इस स्पेशल मंत्र का जाप करें।

प्रेमी को वश में करने के लिए आईने पर रोली से प्रेमी का नाम लिख कर आईना चंद्रदेव को दिखाएं और पूजन के बाद भोग और आईना किसी सुहागन महिला को भेंट करें।

चंद्र पूजन मुहूर्त: शाम 17:50 से शाम 18:35 तक।

चंद्र दर्शन मुहूर्त: शाम 18:35 से शाम 19:20 तक।

पूजन मंत्र: ॐ शीतांशु विभांशु अमृतांशु नम:॥

उपाय चमत्कार:


गुड हेल्थ के लिए: चंद्रदेव पर चढ़े चंदन से मस्तक पर तिलक करें।

गुडलक के लिए: चंद्रदेव को दूध से अर्घ्य दें।

विवाद टालने के लिए: पानी में शक्कर मिलाकर चंद्रदेव को अर्ध्य दें।

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