नरवा, गरूवा, घुरूवा और बाड़ी कार्यक्रम के बेहतर क्रियान्वयन के लिए कार्यशाला का आयोजन

- हितेश दीक्षित

गरियाबंद: छत्तीसगढ़ शासन के महत्वाकांक्षी सुराजी गांव योजना के तहत छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी नरवा, गरूवा, घुरूवा और बाड़ी कार्यक्रम के बेहतर क्रियान्वयन हेतु आज जिला पंचायत के सभाकक्ष में कमिश्नर रायपुर संभाग जी.आर. चुरेन्द्र, कलेक्टर श्याम धावड़े एवं जिला पंचायत के सीईओ आर.के. खुटे की मौजुदगी में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। पावर पाइंट प्रस्तुतिकरण के माध्यम से चारों महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यशाला में जिला पंचायत उपाध्यक्ष पारस ठाकुर, जिला पंचायत सदस्य पुष्पा साहू, जनप्रतिनिधि, सरपंच, ग्राम पटेल, कोटवार, सचिव, रोजगार सहायक एवं विभिन्न विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे।

कार्यशाला में कमिश्नर चुरेन्द्र में उपस्थित सहभागियों को योजना के मूल उद्देश्य के संदर्भ में बताया कि चारों महत्वपूर्ण चिन्हारी वास्तव में ग्रामीण समृद्धि का प्रतीक है। शासन की मंशा के अनुरूप इसे सहेजते हुए विकास के नये सोपान तय करने है। उन्होंने कहा कि तालाब सहित सभी जल स्त्रोतों को संरक्षित करते हुए उन्हें भरने के लिए मनरेगा से नहर नाली का निर्माण किया जायेगा। सामुदायिक चारागाह का विकास करना और गौठान के पास बाड़ी निर्माण की दिशा में भी कार्य किया जायेगा।

चुरेन्द्र ने कहा कि इस योजना की सफलता में गांव के लोगों की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि लोक प्रयोजन के लिए उपयोग में आने वाले जगहों को अतिक्रमण से मुक्त करें, ताकि इन स्थलों का भी बेहतर उपयोग किा जा सके। चुरेन्द्र ने विस्तार से चर्चा करते हुए उपस्थित प्रतिनिधियों से संकल्प लेने का आग्रह किया। कलेक्टर श्याम धावड़े ने कहा कि योजना के क्रियान्वयन से ग्रामीण अर्थ-व्यवस्था समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि राज्य शासन के मंशा अनुरूप इन संसाधनों के चिन्हाकंन का कार्य किया गया है।

प्रत्येक विकासखण्ड में पांच-पांच ग्राम पंचायतों का चयन किया गया है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत गांव में अधिकारियों द्वारा भ्रमण किया जा रहा है तथा बैठक लेकर गांवों की संसाधनों की पहचान भी किया जा रहा है। धावड़े ने कहा कि योजना के बेहतर क्रियान्वय के लिए संबंधित विभाग के साथ रणनीति तय कर अभिसरण करते हुए विकास कार्य किये जायेंगे। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आर.के. खुटे ने कहा कि पहले चरण में गौठान निर्माण करने के लिए ऊंचे स्थानों का चयन किया जायेगा तथा पशुओं के बैठने का पक्का प्लेटफार्म, चारा पानी की व्यवस्था की जायेगी। इसमें ग्रामीणों की सहभागिता भी सुनिश्चित किया जायेगा। उसके पश्चात गरवा, बाड़ी व नरवा विकास के लिए कार्य किया जायेगा।

नरवा के चिन्हांकन के लिए जल स्त्रोतों की उद्गम स्थल, स्थानीय नाला एवं अन्य जल स्त्रोत की पहचान करने सेटेलाईट ईमेज एवं जीआईएस मैप का उपयोग किया जायेगा। इनके बंधान के लिए छोटे स्ट्रक्चर का उपयोग किया जायेगा। बाड़ी के तहत गांवों में उद्यानिकी एवं कृषि विभाग के योजनाओं से सब्जी-भाजी और फलदार पौधों का वृक्षारोपरण किया जायेगा। कार्यशाला में कमिश्नर ने सभी विभागीय अधिकारियों को इस योजना को प्राथमिकता में रख कर कार्य करने के निर्देश दिये हैं।

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