छत्तीसगढ़

पिछले तीन साल से एक टॉयलेट में जीवन बिताने को मजबूर ये महिला

आदिवासी समाज से आती हैं 72 वर्षीय विधवा महिला

भुवनेश्वर:ओडिशा के मयूरभंज में रहने वाली 72 वर्षीय द्रोपदी बेहरा पिछले तीन साल से एक टॉयलेट में जीवन बिताने को मजबूर हैं. 72 वर्षीय विधवा महिला आदिवासी समाज से आती हैं. उनके पास रहने को घर नहीं है और न ही परिवार का कोई सख्स साथ है.

द्रौपदी बीते तीन साल से मयूरभंज इलाके में बने एक टॉयलेट में रह रही हैं. वह इसी में खाना बनाती और खाती हैं. पास के जंगल से लकड़ियां जुटाकर जैसे-तैसे वह अपना जीवन चला रही हैं.

इस पूरे मामले पर इलाके के सरपंच बुधुराम पुटी का कहना है कि बुजुर्ग महिला के लिए घर बनाना मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं आता. अगर भविष्य में किसी योजना के अंतर्गत घर आता है तो हम उन्हें जरूर देंगे.

बता दें मोदी सरकार देश में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण से जुड़ा बिल लाने जा रही है. मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन अमेंडमेंट बिल 2019 को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है.

सीनियर सिटिजन्स के लिए सरकार पहले से कई योजनाएं चलाती आ रही है. बावजूद इसके देश में हजारों की संख्या में सीनियर सिटिजन हैं जो बदतर हाल में जीवन जीने को मजबूर हैं.

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