आत्मोत्थान के लिए कर्म सिद्धांत को चरितार्थ करना आवश्यक : सिद्धांतनिधि

रायपुर : आयम्बिल तप और साथ ही नवपदजी की आराधना की जाए तो हमारे आत्मोत्थान का मार्ग प्रशस्त हो जाता है। भगवान नेमीनाथ ने कृष्ण महाराजा को उनकी द्वारिका नगरी पर आने वाले संकट से बचाने के लिए उन्हें आयम्बिल तप का उपाय बताया था और साढ़े 12 वर्षों तक आयम्बिल तप चला तब तक द्वारिका नगरी पूर्णत: सुरक्षित रही। चंचल मन की स्थिरता के लिए और संकटमुक्ति के लिए नवपदजी की आराधना से श्रेष्ठ उपाय और कोई नहीं। ये बातें ऋषभदेव जैन मंदिर सदरबाजार में श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए साध्वी सिद्धांतनिधि ने कही।
उन्होंने कहा कि, यह नवपदजी की आराधना और आयम्बिल तप वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी शरीर के लिए लाभदायी तो है ही वरन यह आत्मरोगों को भी दूर करने में सहायक है। नौ दिनों तक नवपदजी की आराधना-ओली के साथ हमें श्रीपाल-मैनासुंदरी के जीवन चरित्र का श्रवण करते हुए हमें श्रीपाल और मैनासुंदरी की तरह अपने जीवन में कर्म सिद्धांत को चरितार्थ करना होगा। कर्म सिद्धांत के भीतर में उतरे बिना हमारा उत्थान और जीवन की सफलता-सार्थकता संभव नहीं। हम अपनी मिथ्या धारणा को त्यागकर सम्यक धारणा को स्वीकार कर परमात्मा की आज्ञा को शिरोधार्य करते हुए धर्माचरण करें। श्रीपाल और मैनासुंदरी ने शास्वत पद प्राप्ति के लिए नवपद ओली की आराधना की। उनके जीवन चरित्र का श्रवण करने से पूर्व हम यह संकल्प करें कि, मेरे भीतर भी कर्म सिद्धांत रग-रग में उतर जाए। अनुकूलता मिले तो भी वह उपसर्ग ही है और प्रतिकूलता मिले तो भी वह उपसर्ग है, ऐसी धारणा, ऐसी सोच हमारी हो। क्योंकि अनुकूलताओं में जो जितना राग बढ़ाता है, प्रतिकूलताओं में उतना ही द्वेष भाव उसका बढ़ जाता है। इसीलिए ज्ञानियों ने कहा कि इस क्षदमस्त संसार में जीवनयापन करते हुए मनुष्य को अनुकूलताओं और प्रतिकूलताओं दोनों की अवस्थाओं में सम भाव रखना चाहिए। ऐसा समता भाव यदि आपमें आ गया तो फिर कभी आपको बेचैनी, अशांति, थकान लगेगी नहीं। अच्छा-बुरा जो भी हो दोनों ही अवस्था में गृहस्थ के मन में यही विचार चले कि ये सब संयोग-वियोग पुद्गल के पर्याय हैं, इससे आप कर्म बंधनों की श्रृंखला से मुक्त होते चले जाएंगे।

नवपद ओली की आराधना 27 से : चातुर्मास समिति के प्रचार प्रभारी मानस कोचर ने कहा कि, निपुणा की विदूषी शिष्या प्रवचन स्नेहयशाश्री की अंतेवासिनी साध्वी रत्ननिधि म.सा और साध्वी सिद्धांतनिधि म.सा. की निश्रा में नवपदजी की ओली की आराधना 27 सितम्बर से फिर से शुरू होगी। सुबह 6.45 बजे नवपदजी की स्थापना कराई जाएगी और प्रवचन के पश्चात देववंदन, चैत्यवंदन कराया जाएगा। सूचना सत्र का संचालन करते हुए डॉ. धरमचंद रामपुरिया ने कहा कि, 27 सितम्बर से शुरू हो रही नवपदजी की आराधना के अंतर्गत महावीर भवन सदरबाजार में ओली कराई जाएगी, जिसके लाभार्थी हैं- संतोष कुमार सचिन कुमार दुग्गड़ परिवार। जैन मंदिर सदरबाजार के उपाश्रय में आनंदघन महाराज के स्तवन और अर्थ की विवेचना प्रतिदिन सुबह 8 से 8.45 बजे तक चल रही है। धर्मानुरागीजनों से इस विशेष अध्यात्मिक कक्षा का अधिकाधिक लाभ लेने का आग्रह किया गया है।

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