भारत से बच्चा गोद लेने के लिए अब विदेशियों को साबित करनी होगी योग्यता

भारत से बच्चा गोद लेने के लिए विदेश के भावी अभिभावकों को अब अपनी योग्यता संबंधित नोडल संस्था के सामने साबित करनी होगी।

भारत से बच्चा गोद लेने के लिए विदेश के भावी अभिभावकों को अब अपनी योग्यता संबंधित नोडल संस्था के सामने साबित करनी होगी। उन्हें इसके लिए अपने मानसिक स्वास्थ्य की जांच करानी होगी। नोडल संस्था सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (सीएआरए) ने इस बारे में अपने नियमों में बदलाव किया है।

गौरतलब है कि अमेरिका में गोद ली गई भारतीय बच्ची शेरीन मैथ्यू की मौत के बाद सीएआरए ने ऐसा कदम उठाया है।

इतना ही नहीं सीएआरए ने दुनिया भर में अपनी साझेदार एजेंसियों को भारत से बच्चा गोद लेने के आवेदकों की मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन कराने के लिए भी कहा है।

पिछले महीने जारी किए गए आदेश के तहत सीएआरए ने अथॉराइज्ड फॉरेन एडॉप्शन एजेंसीज (एएफएए) और सेंट्रल अथॉरिटीज जैसी नोडल संस्थाओं को लाइसेंसी डॉक्टरों से ऐसा मूल्यांकन कराने के लिए कहा है।

इस मूल्यांकन के अंतर्गत गोद लेने वाले भावी माता-पिता के तनाव और कुंठ सहने का निर्धारण किया जाएगा।

भावी अभिभावकों के साथ करीब 30-45 मिनट की बातचीत के जरिए उनका मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन होगा। इतना ही नहीं विदेशी आवेदकों को गोद लेने के लिए तैयार किए जाने वाली गृह अध्ययन रिपोर्ट (एचएसआर) के साथ अब मनोवैज्ञानिक जांच की रिपोर्ट भी देनी होगी।

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