वनवासी परिवारों की बेहतरी के लिए वन विभाग ने उठाए कई ऐतिहासिक कदम : गागड़ा

रायपुर:वन मंत्री श्री महेश गागड़ा ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में वन विभाग ने विगत 14 वर्ष में प्रदेश के लाखों वनवासी परिवारों की सामाजिक-आर्थिक बेहतरी के लिए कई महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम उठाए हैं।

तेन्दूपत्ता पारिश्रमिक प्रति मानक बोरा 450 रूपए से बढ़ाकर 2500 रूपए करना, चयनित लघु उपजों की खरीदी के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करना, तेन्दूपत्ता संग्राहक महिलाओं को साड़ी वितरित करना, उनके परिवारों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति आदि योजनाएं इनमें विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

श्री गागड़ा आज यहां अपने विभाग के विगत 14 साल की प्रमुख उपलब्धियों की जानकारी दे रहे थे। उन्होंने बताया कि प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के माध्यम से प्रदेश भर में वर्ष 2004 से वर्ष 2017 लगभग 11 लाख संग्राहकों को 1903 करोड़ 45 लाख रूपए का पारिश्रमिक दिया गया। इसी अवधि में उन्हें 1477 करोड़ 65 लाख रूपए का बोनस भी वितरित किया गया।

तेन्दूपत्ता संग्रहण के दौरान पैरोें में कांटे न गड़े, इसके लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2006-07 में उन्हें चरण पादुका वितरित करने का निर्णय लिया था। श्री गागड़ा ने बताया कि वर्ष 2006-07 से वर्ष 2016-17 तक 11 लाख 57 हजार संग्राहकों को 150 करोड़ 34 लाख रूपए की चरण पादुकाएं दी जा चुकी हैं। कुल करीब 137 लाख जोड़ी चरण पादुकाओं का वितरण किया गया है। इनमें से महिला तेन्दूपत्ता संग्राहकों को 69 लाख 52 हजार जोड़ी चप्पलों और पुरूष तेन्दूपत्ता संग्राहकों को 67 लाख 46 हजार जोड़ी जूते वितरित किए गए हैं।

वन मंत्री ने यह भी बताया कि राज्य सरकार हिंसक वन्य प्राणियों के कारण मनुष्यों और पशुओं को होने वाले नुकसान की स्थिति में प्रभावित परिवारों को मुआवजा भी दे रही है। मुआवजे की राशि में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। वर्ष 2003 में जन हानि के ऐसे मामलों में जहां केवल एक लाख रूपए का मुआवजा दिया जाता था, वहीं उसे बढ़ाकर अब चार लाख रूपए कर दिया गया है।

ऐसे हमलों में स्थायी अपंगता पर जहां वर्ष 2003 में सिर्फ 20 हजार रूपए की सहायता मिलती थी, वहीं इसे बढ़ाकर दो लाख रूपए कर दिया गया है। घायलों को दी जाने वाली राशि भी इस दौरान पांच हजार रूपए से बढ़ाकर 59 हजार एक सौ रूपए कर दी गई है।

पशु हानि के प्रकरणों में अधिकतम क्षतिपूर्ति 30 हजार रूपए निर्धारित की गई है। जंगली हाथियों द्वारा जनहानि के मामलों में पीड़ित परिवारों को कम से कम 25 हजार रूपए की तात्कालिक सहायता दी जाती है, वहीं इन हाथियों से फसल क्षतिग्रस्त होने पर प्रभावित किसान को प्रति एकड़ नौ हजार रूपए की दर से आर.बी.सी. 6-4 के तहत राशि का भुगतान करने के बाद प्रति एकड़ अंतर की राशि कैम्पा मद से दी जा रही है।

जंगली हाथियों के कारण मकानों के पूर्ण रूप से नष्ट होने पर सामान्य इलाकों में 95 हजार एक सौ रूपए और पहाड़ी इलाकों में एक लाख एक एक हजार 900 रूपए का आवास अनुदान देने का भी प्रावधान किया गया है। श्री गागड़ा ने यह भी बताया कि राज्य में जंगली हाथियों की संख्या 30 से बढ़कर लगभग 300 हो गई है। उनमें कॉलर आईडी लगायी जा रही है।

साथ ही वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को हाथी प्रभावित इलाकों में उनके आवागमन पर निगाह रखने और वन वासियों की सुरक्षा का समुचित इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में जनभागीदारी से वनों की रक्षा और उनके विकास के लिए कई कदम उठाए गए हैं।

संयुक्त वन प्रबंधन योजना के तहत लगभग 20 हजार गांवों में से वन क्षेत्र की सीमा से पांच किलोमीटर भीतर 11 हजार 185 गांवों में जंगलों की रक्षा और वन विकास के लिए सात हजार 887 वन प्रबंध समितियों का गठन किया गया है।

वर्ष 2006-07 से प्रांरभ इस योजना के तहत इन समितियों में 27 लाख 63 हजार ग्रामीण सदस्य के रूप में शामिल हैं, जिन्हें 33 हजार 190 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र अर्थात् कुल वन क्षेत्र का 55 प्रतिशत इलाका इस कार्य के लिए सौंपा गया है। इन समितियों के सदस्यों में 14 लाख 36 हजार महिलाएं भी शामिल हैं।

वन अधिकार मान्यता पत्रों के वितरण में भी छत्तीसगढ़ राज्य अग्रणी है। वन विभाग द्वारा तीन लाख 73 हजार 718 वनवासी परिवारों को वन अधिकार मान्यता पत्रों के साथ खेती के लिए तीन लाख 52 हजार हेक्टेयर जमीन आवंटित की गई है।

श्री गागड़ा ने बताया कि तेन्दूपत्ता संग्राहक परिवारों के लिए बीमा योजनाओं का और उनके बच्चों के लिए शिक्षा प्रोत्साहन योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। जनश्री बीमा योजना के अंतर्गत 18 वर्ष से 59 वर्ष के संग्राहक परिवार के मुखिया की सामान्य मृत्यु होने पर 30 हजार रूपए और दुर्घटना जनित मृत्यु होने पर 75 हजार रूपए उनके आश्रित को दिए जाते हैं। पूर्ण विकलांगता पर भी 75 हजार रूपए देने का प्रावधान किया गया है।

इन परिवारों के 9वीं से 12वीं अथवा आई.टी.आई. में पढ़ाई कर रहे बच्चों को शिक्षा सहयोग योजना के तहत 1200 रूपए प्रति वर्ष प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। वर्ष 2007-08 से 2016-17 तक जनश्री बीमा योजना के तहत 45 हजार 782 दावा प्रकरणों का निराकरण करते हुए संबंधित परिवारों को 110 करोड़ 91 लाख रूपए दिए गए।

संग्राहक परिवारों के छह लाख 72 हजार से ज्यादा बच्चों को इस दौरान 69 करोड़ 48 लाख रूपए की छात्रवृत्ति दी गई। तेन्दूपत्ता संग्राहकों के लिए संचालित समूह बीमा योजना के तहत वर्ष 2003-04 से वर्ष 2016-17 तक लगभग एक लाख 07 हजार दावा प्रकरणों में 49 करोड़ 84 लाख रूपए का भुगतान किया गया।

इस योजना में सामान्य मृत्यु पर 3500 रूपए, आंशिक विकलांगता पर 12 हजार 500 रूपए और दुर्घटना जनित मृत्यु अथवा पूर्ण विकलांगता पर 25 हजार रूपए की बीमा राशि का प्रावधान है।

श्री गागड़ा ने बताया वनोपज सहकारी समितियों के सदस्य संग्राहक परिवारों के मेधावी बच्चों के लिए शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत प्रोत्साहन राशि का प्रावधान किया गया है। प्रत्येक समिति के अंतर्गत कक्षा आठवीं में सबसे ज्यादा नम्बर पाने वाले एक बालक और एक बालिका को दो-दो हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

दसवीं बोर्ड में सर्वाधिक नम्बर मिलने पर प्रत्येक समिति से एक बालक और एक बालिका के लिए ढाई-ढाई हजार रूपए का प्रावधान किया गया है। बारहवीं बोर्ड में सबसे ज्यादा नम्बर मिलने पर प्रत्येक समिति से एक बालक और एक बालिका को तीन-तीन हजार रूपए दिए जाते हैं। वर्ष 2011-12 से वर्ष 2016-17 तक इस योजना में 21 हजार 310 बच्चों को पांच करोड़ 25 लाख रूपए दिए गए।

इसी तरह मेडिकल और इंजीनियरिंग तथा कानून, एम.बी.ए. और नर्सिंग की पढ़ाई के लिए प्रथम वर्ष में 10 हजार रूपए, द्वितीय, तृतीय और चौथे वर्ष में पांच-पांच हजार रूपए इस प्रकार कुल 25 हजार रूपए की छात्रवृत्ति दी जा रही है। वर्ष 2011-12 से वर्ष 2016-17 तक 1539 बच्चों को एक करोड़ 37 लाख रूपए की छात्रवृत्ति का भुगतान किया गया। श्री गगाड़ा ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में राज्य सरकार दो दिसम्बर से तेन्दूपत्ता संग्राहकों के लिए बोनस तिहार का भी आयोजन करने जा रही है। मुख्यमंत्री जिला मुख्यालय बीजापुर से इसकी शुरूआत करेंगे।

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