छत्तीसगढ़

जल, जंगल और जमीन के प्रबंधन में वनवासियों की भागीदारी के लिए वन अधिकार कानून  : टी.एस. सिंहदेव

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री ने रेडियो पर दी वन अधिकार कानून की जानकारी

ब्यूरो चीफ : विपुल मिश्रा

रायपुर. 1 नवम्बर 2020. पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने आज रेडियो पर वन अधिकार कानून की जानकारी दी। उन्होंने आज शाम साढ़े सात बजे आकाशवाणी रायपुर से प्रसारित विशेष कार्यक्रम ‘हमर ग्रामसभा’ में इसके विभिन्न प्रावधानों के बारे में विस्तार से बताया। सिंहदेव ने कहा कि वन अधिकार कानून जल, जंगल और जमीन के प्रबंधन में वनवासियों की भागीदारी सुनिश्चित करता है।

वनों में रहने वाले और वन संपदा से अपनी आजीविका चलाने वालों को उनके प्रबंधन में भी हिस्सेदार बनाने के लिए वन अधिकार कानून बनाया गया है। सिंहदेव ने आज सभी श्रोताओं को राज्य स्थापना दिवस की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए उनके द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब भी दिए।

सिंहदेव ने ‘हमर ग्रामसभा’ में कहा कि स्थानीय निवासियों को ही वन संसाधनों का लाभ सबसे पहले मिलना चाहिए। वन अधिकार कानून के तहत ग्राम सभा को भी वन विभाग के साथ मिलकर जंगल की देखरेख, संरक्षण और संवर्धन के अधिकार दिए गए हैं। छत्तीसगढ़ शासन इस कानून को पूरी तरह लागू करने के लिए गंभीरता से काम कर रही है।

वन अधिकार पत्रों के अस्वीकृत प्रकरणों पर पुनर्विचार कर पात्र लोगों को वन अधिकार पत्र जारी किए जा रहे हैं। वन अधिकार पत्र जारी करने के मामले में छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में है।  सिंहदेव ने कार्यक्रम में बताया कि वन अधिकार कानून के अंतर्गत वन भूमि के सामुदायिक उपयोग के संबंध में फैसला लेने का अधिकार संबंधित ग्राम सभा को दिया गया है।

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