करोड़ों की सपत्ति का मोह छोड़, एक परिवार के 4 लोग ले रहे दीक्षा

भिवंडी के गोकुलनगर के राकेश कोठारी का पूरा परिवार वैराग्य की राह पर निकल पड़ा है।

मुंबई

भिवंडी के गोकुलनगर के राकेश कोठारी का पूरा परिवार वैराग्य की राह पर निकल पड़ा है। राकेश कोठारी, उनकी पत्नी सीमा, बेटा मीत और बेटी शैली 11 फरवरी को गुजरात के संखेश्वर में जैन धर्म की दीक्षा लेंगे।

इन्होंने दीक्षा लेकर जैन धर्म के अनुसार संयमित जीवन जीने का फैसला किया है। उन्होंने पारंपरिक तरीके से बैंड-बाजे के साथ अपने वैराग्य का उत्सव मनाया, जिसमें भारी संख्या में जैन समाज के लोग शामिल हुए।

गोकुलनगर स्थित वीर संन्यास वाटिका तक प.पू.पं. श्रीजयभूषण विजयजी म.सा. के मार्गदर्शन में गिरनार भावयात्रा के बाद दीक्षा के लिए विरती वंदना कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

0-छोड़ रहे करोड़ों की सपत्ति

राकेश कोठारी (45) टेक्सटाइल व्यापारी हैं और उनका करोड़ों रुपये का कारोबार है। सीमा कोठारी (43) गृहिणी हैं। उनके बेटे मीत कोठारी (21) हिंदुजा कॉलेज से बीकॉम करने के बाद सीए का कोर्स कर रहे थे।

शैली कोठारी (19) एचएससी के बाद धार्मिक शिक्षा ले रही थीं। उन्हें गाने का शौक था और वह इंडियन आयडल में जाना चाहती थीं। इन चारों के दीक्षा लेने के बाद अब राकेश कोठारी के परिवार में उनका कारोबार देखने वाला उनके कोई नहीं रहेगा। उनके घर में भी ताला लग जाएगा।

‘शाश्वत सुख के लिए’

‘मैंने जैन धर्म को समझ लिया है। शाश्वत सुख साधू जीवन में ही मिल सकता है। मोक्ष की प्राप्ति दीक्षा लेने में ही है। इसीलिए मैंने दीक्षा लेने का निर्णय किया है। संसार में दुखों को कम करने के लिए मेरे परिवार ने वैराग्य धारण किया है।’

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