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पीएफ का पैसा DHFL में डालने के आरोप में पूर्व एमडी एपी मिश्रा गिरफ़्तार

1,855 करोड़ रुपये की रिकवरी और करीब 2267 करोड़ रुपया डूबा

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के पीसीएल के पूर्व एमडी एपी मिश्रा गिरफ़्तार किये गए हैं. उन पर उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग के कर्मचारियों के पीएफ का पैसा निजी कंपनी DHFL में लगाने का आरोप है.

यूपी सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश की

इस मामले की जांच फिलहाल EOW कर रहा है लेकिन यूपी सरकार ने सीबीआई जांच की भी सिफारिश की है.UPPCL के पूर्व वित्त निदेशक सुधांशु द्विवेदी और इम्पलाइज ट्रस्ट के तत्कालीन सचिव प्रवीण कुमार गुप्ता को पुलिस ने शनिवार को गिरफ्तार किया था इन तीनों अधिकारियों पर बिजली विभाग के कर्मचारियों के PF का पैसा DHFL में लगाने का आरोप है

बिजली विभाग के कर्मचारियों के पैसे भी डूबे

पूरा घोटाला करीब 2 हजार 631 करोड़ का है. DHFL कंपनी डूब चुकी है और उसी के साथ बिजली विभाग के कर्मचारियों के पैसे भी डूबे हुए हैं. कॉर्पोरेशन के पूर्व निदेशक (वित्त) सुधांशु द्विवेदी और इम्पलाइज ट्रस्ट के तत्कालीन सचिव प्रवीण कुमार गुप्ता को पुलिस ने शनिवार को गिरफ्तार किया गया था.

पूर्व एमडी एपी मिश्रा राजनीतिक रसूख वाले अफसर रहे हैं. उन्होंने अखिलेश यादव पर किताब भी लिखी थी. अखिलेश यादव ने एपी मिश्रा को रिटायरमेंट के बाद तीन बार सेवा विस्तार भी दिया था.

पीएफ घोटालो को लेकर कांग्रेस मचासचिव प्रियंका गांधी ने योगी सरकार पर सवाल उठाए थे. प्रियंका गांधी ने इसे लेकर ट्वीट किया, ”एक खबर के अनुसार भाजपा सरकार बनने के बाद 24 मार्च 2017 को पॉवर कोर्पोरेशन के कर्मियों का पैसा डिफ़ॉल्टर कम्पनी DHFL में लगा.

सवाल ये है कि भाजपा सरकार दो साल तक चुप क्यों बैठी रही? कर्मचारियों को ये बताइए कि उनकी गाढ़ी कमाई कैसे मिलेगी?” उन्होंने आगे लिखा, ”और किन-किन विभागों का पैसा डिफ़ॉल्टर कम्पनियों में लगा है? सारी चीजें अभी सामने लाइए. जवाब तो देना ही होगा, मेहनत की गाढ़ी कमाई का सवाल है.”

आरोप है कि करीब 4,100 करोड़ रुपये का DHFL में निवेश किया गया था . DHFL कंपनी डूब गई और इसी के साथ बिजली कर्मचारियों के PF का पैसा भी डूब गया. बताया जाता है कि 1,855 करोड़ रुपये की रिकवरी हुई, लेकिन बचा हुआ करीब 2267 करोड़ रुपया डूब गया है.

ये घोटाला 2014 का बताया जाता है। जानकारी मिली है कि पहले तय हुआ था कि PF का पैसा PNB में लगाया जाएगा लेकिन बाद में नियम का उल्लंघन करते हुए पैसा DHFL में लगा दिया गया.

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