दावोस में रघुराम राजन ने बताया भारत के लिए कैसा होगा साल 2018

स्विटजरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के इतर भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने एनडीटीवी से एक्सक्लूसिव बातचीत की.

दावोस : स्विटजरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के इतर भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन से बातचीत की. आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने डॉ. प्रणय रॉय के साथ बातचीत के दौरान जीएसटी और भारत की अर्थयव्यवस्था पर इसके प्रभाव से लेकर डिजिटल पेमेंट जैसे कई मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी.

वैश्विक आर्थिक ग्रोथ की पहुंच से भारत के दूर होने के मुद्दे पर रघुराम राजन ने कहा कि सबसे पहले नोटबंदी के प्रभाव ने 2017 में भारत की अर्थव्यवस्था को सुस्त कर दिया और अब जीएसटी ने. मगर मुझे लगता है कि लॉन्ग टर्म जीएसटी में काफी सकारात्मक प्रभाव आएगा.

मेरा मतलब है कि ऐसे लोग जो कहते हैं कि जीएसटी लागू करने से पहले बेहतर तैयारी करनी चाहिए थी, हमें थोड़ा और समय देना चाहिए था, मगर मेरा सेंस कहता है कि बहुत सी समस्याएं किसी काम को करने के वक्त आती हैं.

इसलिए अगर हम समस्याओं का समाधान करते हुए आगे बढ़ते हैं तो यह हमारे लिए काफी फायदेमंद होगा. मुझे लगता है कि जब लोग विकास के प्रभाव को देखते हैं, काफी बड़े-बड़े प्रभाव नजर आते हैं, आप जानते हैं कि इन्हीं प्रभावों ने हमें दुनिया की अर्थव्यवस्था से पीछे कर दिया. अधिकांश देशों ने अपने विकास के फिगर्स को अपडेट किया, मगर हमने इसे डाउनग्रेड किया.

जब रघुराम राजन से पूछा गया कि क्या तेल की कीमतों की वजह से विकास दर प्रभावित हो रहा है, तो उन्होंने कहा कि जब इसकी कीमत थी, चूंकि जब से हम तेल का आयात कर रहे हैं, इसे जीडीपी के एडिशन के रूप में दिखाया गया.

अब जब इसकी कीमत बढ़ रही है, तो इसे घाटे के रूप में दिखाया जाएगा. क्योंकि हमारी आयात बढ़ेगी और निश्चित रूप से आगे बढ़ने वाले चिंता का स्रोत होगा क्योंकि यह जीडीपी डेटा में अभी तक पंजीकृत नहीं हुआ है.

जब रघुराम राजन से सवाल किया गया कि क्या वो कभी नोटबंदी नहीं करते? तो उन्होंने कहा कि पीछे की ओर देखने पर इसका जवाब देना काफी आसान है. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि सरकार ने उस वक्त इस बारे में मुझसे पूछा था और हमने अपने विचार भी दिये थे, मगर साथ ही मुझे लगता है कि यह काफी कठिन था. मुझे नहीं लगता कि इसका वांछित प्रभाव हुआ होगा और इसकी कीमत चुकानी पड़ी होगी.

नोटबंदी पर उनके विचार से सहमत अर्थशास्त्रियों के सवाल पर रघुराम राजने कहा कि ये फैसला लेने से पहले किसी भी मौद्रिक अर्थशास्त्री ने पैसे के बेहतर प्रिंट के लिए कहा होगा.

मुझे लगता है कि अगर सरकार कुछ आगे बढ़ाना चाहती है तो आरबीआई को पांचवें स्तंभ होना चाहिए और मेरा अनुमान कानूनी तौर के साथ-सात नैतिक रूप से भी है. आप किसी भी संस्था को काम करने से नहीं रोक सकते.

जब रघुराम राजने से पूछा गया कि क्या आरबीआई अब पहले से कम स्वतंत्र हो गई है तो उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि ऐसा है. मुझे लगता है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पास विभिन रास्तों से जो आजादी है, वह काफी है. मैं मानता हूं कि नौकरशाहों, वित्त मंत्री और रिजर्व बैंक के बीच एक निरंतर संघर्ष चलता रहता है.

जब उनसे पूछा गया कि आपको राज्यसभा की सदस्यता के लिए ऑफर किया गया तो आपने क्यों नहीं लिया. तो इस सवाल पर रघुराम राजन ने आधिकारिक तौर पर कहा कि मुझे लगता है कि मेरे पास एक नौकरी है और मैं इसे कर रहा हूं, तो मैं राज्यसभा नहीं जाना चाहता.

वहीं अौपचारिक जवाब में कहा कि मैं अपने अकादमिक जॉब से खुश हूं और मुझे यही पसंद है. साथ ही मुझे भारत के लिए दायित्व की भावना महसूस होती है. इसलिए मैं दोनों जगह यानी दुनिया के साथ-साथ भारत में भी अपने आपको रखने की कोशिश करता हूं.

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