चार जातियों के नेताओं ने बढ़ाई भाजपा की मुश्किल, पहुंचा सकते हैं नुकसान

राजस्थान।

राजस्थान विधान सभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ बीजेपी को झटके लग रहे हैं। ऐसे में अलग-अलग जातियों के नाराज नेताओं द्वारा पार्टी को नुकसान पहुंचाने का अंदेशा गहरा गया है। तीन दिन पहले पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह के बेटे और बाड़मेर जिले के शिव विधानसभा सीट से विधायक मानवेन्द्र सिंह ने बीजेपी छोड़ दी थी।

माना जाता है कि बाड़मेर और राज्य के पश्चिमी इलाकों में राजपूत समुदाय में उनका और उनके पिता का अच्छा खासा प्रभाव रहा है। मानवेंद्र सिंह ने बीजेपी छोड़ते हुए आरोप लगाया था कि 2014 में बीजेपी ने उनके पिता को टिकट न देकर राजपूत समुदाय का अपमान किया था। ऐसे में आशंका जाहिर की जा रही है कि राजपूत समुदाय इस बार बीजेपी को शायद समर्थन ना दे।

माना जा रहा है कि मानवेंद्र सिंह बाड़मेर से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे जबकि शिव विधान सभा सीट से उनकी पत्नी लड़ सकती हैं। अगर ऐसा हुआ तो जसोल रॉयल फैमिली के लिए राजपूत मतदाताओं की सहानुभूति उमड़ सकती है और ऐसा हुआ तो इसका खामियाजा बीजेपी को भुगतना पड़ सकता है। जसवंत सिंह की वजह से राजपूत समुदाय बीजेपी का कोर वोटर समझा जाता था लेकिन जसवंत सिंह से बेरुखी और मानवेंद्र सिंह द्वारा बीजेपी छोड़ने के बाद अब स्थितियां बदल सकती हैं।

वसुंधरा सरकार और बीजेपी नेतृत्व से नाराज रहने वालों में ब्राह्मण नेता घनश्याम तिवाड़ी, फायरब्रांड जाट नेता हनुमान बेनीवाल और गुर्जर आंदोलन के केंद्र में रहे किरोड़ी सिंह बैंसला भी शामिल हैं। छह बार विधायक रहे घनश्याम तिवाड़ी ने भी पिछले दिनों बीजेपी से अपना नाता तोड़ लिया और सीएम वसुंधरा राजे के खिलाफ विद्रोह का बिगूल फूंकते हुए भारत वाहिनी पार्टी बनाई है।

उन्होंने राज्य की सभी 200 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का एलान किया है। राज्य में बीजेपी को स्थापित करने और मजबूती देने वालों में तिवाड़ी एक बड़ा चेहरा रहे हैं। एक दिन पहले ही तिवाड़ी ने प्रेस कॉन्फ्रेन्स कर बीजेपी पर सवर्णों को छलने और आरक्षण का झूठा ख्वाब दिखाकर ठगने का आरोप लगाया।

निर्दलीय विधायक और जाट नेता हनुमान बेनीवाल ने भी वसुंधरा सरकार के खिलाफ हल्ला बोल रखा है। उन्होंने हरवीर सहारण हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग की है। हनुमान बेनीवाल आर्थिक आधार पर जाटों को और अन्य वंचित वर्ग को आरक्षण देने की मांग उठाते रहे हैं। जाट समुदाय में उनकी अच्छी पकड़ है। माना जा रहा है कि वो घनश्याम तिवाड़ी के साथ गठबंधन कर बीजेपी का चुनावी समीकरण बिगाड़ सकते हैं।

गुर्जरों के लिए लड़ाई लड़ रहे किरोड़ीमल बैंसला को भी नाराज बताया जा रहा है। ऐसे में इन चारों जातियों के नेताओं की नाराजगी का खामियाजा बीजेपी को विधान सभा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है। बता दें कि 200 सीटों वाले राजस्थान विधान सभा में 2013 के चुनावों में बीजेपी को 162, कांग्रेस को 21 सीटें और अन्य को 17 सीटें मिली थीं।

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