छत्तीसगढ़

ग्रामीणों ने गड्ढे से सकुशल निकाले हाथियों के चार प्रिंस

-रविशंकर शर्मा
रायपुर/सीतापुर : सरगुजा जिले के सीतापुर नगर पंचायत से लगे ढेलसरा ग्राम के एक गड्ढे से बुधवार सुबह हाथियों के चार प्रिंस सकुशल निकाले गए। इस रेस्क्यू के बाद ग्रामीणों में खुशी की लहर व्याप्त है। दरअसल यह रेस्क्यू वन विभाग की टीम ने नहीं बल्कि ग्रामीणों ने किया। ऐसा कहना है सीतापुर विधायक अमरजीत भगत का। तो वहीं डीएफओ प्रियंका पाण्डेय ने वीएनएस से कहा कि, सुबह 6 बजे सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम दल-बल के साथ पहुंची थी। ग्रामीणों की मदद से पेड़ काटकर गड्ढे में डाले गए। पूरे 7 घंटे बाद हाथी के बच्चों को बाहर निकाला गया। घटना मंगलवार देर रात ढाई बजे की थी।

विधायक ने लगाया आरोप : विधायक भगत का कहना है कि, देश में बोरवेल में लोगों के गिरने की खबरे तो आम हो चली हैं। शासन-प्रशासन की इच्छाशक्ति ही नहीं कि, कुछ किया जाए। हरेक की किस्मत प्रिंस के जैसी नहीं होती। हल्देड़ी के प्रिंस को बोरवेल से निकालने में 50 घंटे लग गए थे। इसके बाद कई घटनाएं हुई। इसी तरह जानवरों के गड्ढों में गिरने की घटनाएं भी आम हो गई है। जंगल खत्म होते जा रहे हैं और जानवर शहर-गांव में प्रवेश कर रहे हैं। रेस्क्यू टीम के पास संसाधनों की कमी है। विधायक ने कहा कि, घटना की खबर बुधवार अल सुबह उन्हें मिली। लगातार सीसीएफ केके बिसेन,डीएफओ प्रियंका पाण्डेय, पीसीसीएफ ,सीएफ को फोन किया, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। यहां तक की घटना के संबंध में वनमंत्री महेश गागड़ा से भी बात हुई। मीडिया के हस्तक्षेप से विभाग की नींद उड़ी, लेकिन तब तक ग्रामीणों की कड़ी मेहनत से सुबह 10 बजे के करीब हाथी के चारों बच्चों को गड्ढे से सकुशल निकाल लिया गया।

घटना के बाद से मंडराते रही मादा हाथी : मंगलवार रात अपने चार बच्चों के गड्ढे में गिरने के बाद मादा हाथी कुएं के आसपास ही मंडराते रही। गांव में दहशत का माहौल रहा। कहीं वह आक्रोशित हो जाती तो जान-माल की हानि भी हो सकती थी। क्षेत्रीय विधायक अमरजीत भगत ने वन विभाग पर आरोप लगाते हुए कहा कि, जिम्मेदार अधिकारी फोन नहीं उठाते, वे गहरी नींद में सो रहे हैं। जबकि इस रेस्क्यू में उन्हीं ग्रामीणों में उत्साह देखा गया, जो हाथियों के आतंक से दहशत में जीने और रतजगा करने मजबूर हैं। हाथी के बच्चों को निकालने की जुगत में एक ग्रमीण बाल-बाल चोटिल होने से बच गया, उसकी जान भी जा सकती थी। दरअसल हाथी के एक बच्चे ने उसके पैर पर अपना पैर ही रख दिया था।

विधायक हैं राजनीति तो करेंगे, मेहनत हमने की : डीएफओ
डीएओ प्रियंका पाण्डेय ने वीएनएस से कहा कि, अब अमरजीत भगत विधायक हैं, राजनीति तो करेंगे ही। बयान देना उनका काम है, जबकि पूरी मेहनत हमने की। हां इस कार्य में ग्रामीणों का भी साथ रहा। फारेस्ट गार्ड और फारेस्ट विभाग की पूरी टीम ने लगभग 5 घंटे के रेस्क्यू से हाथी के बच्चों को बाहर निकाला। हाथी के बच्चें इंटेलीजेंट होते हैं। जेसीबी से जब पास ही गड्ढा खोदा जा रहा था, तो उन्हें आभास हुआ कि, उन्हें बचाया जा रहा है और वे कुछ पीछे हटे। वहीं उनकी मां मादा हाथी भी शांत रही। फारेस्ट अधिकारियों के निर्देश पर ही ग्रामीणों ने पेड़ काटे। इस रेस्क्यू में फारेस्ट की टेक्निकल टीम की रूपरेखा सराहनीय रही। उन्होंने कहा कि, एक अति उत्साही ग्रामीण की जान बाल-बाल बची। सेल्फी लेने की कोशिश किसी अप्रिय घटना को अंजाम दे सकती थी। ग्रामीण के खिलाफ वन प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत कार्रवाई की जाएगी। रेस्क्यू आपरेशन में प्रशासन और पुलिस का भी सहयोग रहा।

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