छत्तीसगढ़

चार साल बाद सामने आई अफसरों की लापरवाही, शिक्षाकर्मियों के इनकम टैक्स रिटर्न में 16 करोड़ का गड़बड़झाला

सीईओ और बीआरसी ने अपने पैन कार्ड पर जमा करा दिए शिक्षाकर्मियों के टीडीएस,

रायपुर : समान काम और संविलयन की मांग पर सरकार और अफसरों पर द्वारा बार छले जा रहे शिक्षाकर्मियों के इनकम टैक्स रिटर्न में 16 करोड़ का गोलमाल का बड़ा मामला सामने आया है। दरअसल पूरा मामला इनकम टैक्स रिटर्न को लेकर है। बता दें कि साल 2013-14 में शिक्षाकर्मियों को वेतनमान का लाभ जब से मिलना शुरू वे इनकम टैक्स के दायरे में आ गए। नियमानुसार सरकार अपने नियमित अधिकारी और कर्मचारी के साथ इनकम टैक्स जमा कराती रही है। शिक्षाकर्मियों के लिए यही प्रावधान लागू होना था।

शिक्षाकर्मियों के वेतन से इनकम टैक्स की राशि काटने की जिम्मेदारी जनपद पंचायत सीईओ और बीईओ-बीआरसी को दी गई है। सरकार के निर्देश के बाद शिक्षाकर्मियों का इनकम टैक्स के लिए पैसा सैलरी काट लिया गया, लेकिन इनकम टैक्स डिडक्शन में पैन नंबर जनपद सीईओ ने खुद के दे दिया तो कहीं बीआरसी ने खुद का पैन नंबर डाल दिया। ऐसा 2013-14, 2015-16, 2016-17 तक चलता रहा।

ऐसे सामने आया गड़बड़झाला

इस मामले का खुलासा तब सामने आया जब शिक्षाकर्मियों ने रिटर्न के लिए फाइल किया तो पैन नंबर से खाते में पैसा जमा दिखाई ही नहीं दे रहा। रिटर्न जमा की रकम किसी जगह पर जनपद सीईओ के खाते में तो किसी बीआरसी के खाते में जमा बताई जा रही है। हैरानी की बात तो ये है कि शिक्षाकर्मियों के वेतन की आयकर की कटौती को सामूहित तौर से एक ही पैन नंबर के साथ करा दिया गया। अब सीईओ व बीईओ द्वारा टीडीएस रिटर्न फाइल नहीं करने के कारण शिक्षाकर्मियों के पेन नंबर में आयकर कटौती की राशि जमा नहीं हो रही है।

16 करोड़ से ज्यादा की राशि की गड़बड़ी

आंकड़ों के मुताबिक शिक्षाकर्मियों के आयकर रिटर्न करने में करीब 16 करोड़ रुपए से ज्यादा का गोलमाल हुआ है। अधिकारियों की लापरवाही के कारण आयकर विभाग को चालान की राशि नहीं भेजी गई है। इस वजह से शिक्षाकर्मियों इनकम रिटर्न जमा कराने में ब्याज के रूप में पैनाल्टी चुकानी पड़ रही है। पहले से कम वेतन की वजह से आर्थिक तंगी झेल रहे शिक्षाकर्मियों के सामने अफसरों की लापरवाही से समस्या बढ़ गई है। इस पूरे मामले के संज्ञान में आने के बाद नगरीय निकाय मोर्चा के प्रांतीय संचालक संजय शर्मा ने एक पत्र पंचायत विभाग के संचालक तारण प्रकाश सिन्हा को भेजा है।

जिसमें सरकारी कर्मचारियों के तर्ज पर ही तमाम शिक्षाकर्मियों का भी डिडक्शन कराने की मांग की गई है। इस मामले में टैक्स एक्सपर्ट का कहना है कि टीडीएस की पूरी जिम्मेदारी इम्पालायर की है, यदि टीडीएस नहीं जमा कराया गया, तो इनकम टैक्स एक्ट तहत इंटरेस्ट, पेनाल्टी और सजा का भी प्रावधान है। लेकिन इस केस में जमा तो किया गया है, लेकिन दूसरे के पैन में ऐसे में रिटर्न को रिवाइज किया जा सकता है।

क्या कहना है शिक्षाकर्मी संघ का

हर बार शिक्षाकर्मियों के साथ ही ऐसा छल क्यों होता है, सरकार को सभी को समान नजरों से देखना चाहिए, समझ नहीं आता, वो अपने कर्मचारियों के इनकम टैक्स के मामले में पूरी सतर्कता बरतती है और शिक्षाकर्मियों के मसले पर चंद अफसरों को मनमर्जी की छूट दे देती है..हमारा आरोप है कि 16 करोड़ से ज्यादा की गड़बड़ी हुई हे..वो तत्काल शिक्षाकर्मियों को रिफंड होऔर साथ ही साथ अपने नियमित कर्मचारियों के तर्ज पर हम शिक्षाकर्मियों के भी टीडीएस डिडक्शन के बाद हमारा रिटर्न हमारे पैन नंबर के साथ जमा सरकार कराए।

संजय शर्मा, प्रांतीय संचालक छत्तीसगढ़ शिक्षाकर्मी मोर्चा

शिक्षाकर्मियों के साथ भेदभाव का व्यवहार बंद कर उनके साथ भी सरकारी कर्मचारियों के समान ही व्यवहार करना चाहिए आखिर इस सब का खामियाजा अंत में जाकर आम शिक्षाकर्मी को ही भुगतना पड़ता है ऐसे ही समय पर वेतन ना मिलने और तमाम तकलीफों से शिक्षाकर्मी जूझ रहा है उसके बाद इस तरह की तकलीफे शिक्षाकर्मियों को काफी परेशान कर देती है जबकि इसके लिए वे जिम्मेदार भी नहीं हंै।

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चार साल बाद सामने आई अफसरों की लापरवाही, शिक्षाकर्मियों के इनकम टैक्स रिटर्न में 16 करोड़ का गड़बड़झाला
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