पिथौरा में बच्चों को दिया जा रहा निशुल्क शतरंज का प्रशिक्षण

मनराखन ठाकुर

पिथौरा। छत्तीसगढ की राजधानी रायपुर से उड़ीसा के संबलपुर राजमार्ग पर महज 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक छोटा सा कस्बा पिथौरा अपनी विभिन्न गतिविधियों के कारण अपनी पहचान बना चुका है।

शतरंज की पाठशाला से बच्चे न केवल खेल में आगे बढ़ेंगे बल्कि पढ़ाई में भी तेज़ होंगे। रायपुर, महासमुंद बलौदाबाजार एवं सीमावर्ती राज्य ओडिशा की खरियार रोड ,झारबंद, सोहेला,बरगढ़ के हृदयस्थल की भौगोलिक दृष्टिकोण के कारण यहां हर गतिविधियों का आगाज होता है।

इससे ना केवल लोगों को एक प्लेटफार्म मिलता है बल्कि उनके सपनों के हौसले की नई उड़ान की शुरुआत होती है। खेल ,कला, संस्कृति, पर्यटन की विविध गतिविधियों के बीच खेल को जीवन का हिस्सा बनाने के लिए इस अंचल के होनहार छात्र-छात्राओं एवं युवकों के लिए एक अभिनव प्रयास की शुरुआत की गई है।

इस अंचल में शतरंज की पाठशाला के नाम से लोग जानते हैं और साप्ताहिक अवकाश के दिन भी कुशल प्रशिक्षकों के माध्यम से प्रशिक्षित होकर खेत क्षितिज के लिए एक बेहतर संभावना तैयार कर रहे हैं।

निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है सुविधाएं

शतरंज की पाठशाला के संयोजक एवं शतरंज के राष्ट्रीय कोच हेमन्त खुटे ने बताया कि छत्तीसगढ़ में शतरंज एक ऐसी पाठशाला है जहां सभी सुविधाएं पूर्णता निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है।

चाहे शतरंज की बिसात हो, शतरंज की घड़ी हो या फिर शतरंज साहित्य। पाठशाला के सभी पंजीकृत खिलाडियों को मासिक पत्रिका शतरंज सम्राट प्रतिमाह निःशुल्क वितरित किया जाता है।

ग्रामीण अंचल में शतरंज खेल को बढ़ावा देना

शतरंज की पाठशाला की स्थापना छत्तीसगढ़ प्रदेश चेस एसोसिएशन के सचिव बी चंद्रशेखर अय्यर एवं रायपुर जिला शतरंज संघ के सचिव पेरी चंद्रशेखर की गरिमामयी उपस्थिति में 28 अक्टूबर 2018 को रविवार के दिन लाखागढ़ (पिथौरा) स्थित साहू अकादमी के सभागार में किया गया।

इस पाठशाला का उद्देश्य शतरंज खेल को ग्रामीण अंचल में बढ़ावा देना,शतरंज के लिए उपयुक्त वातावरण का निर्माण एवं महासमुन्द जिले से अधिकाधिक संख्या में रेटेड खिलाड़ी तैयार करना है।

शतरंज की पाठशाला पर प्रतिक्रियाएं

@ बी चन्द्रशेखर अय्यर (सचिव छत्तीसगढ़ प्रदेश चेस एसोसिएशन )

इस पाठशाला के जरिये ग्रामीण अंचलों की खेल प्रतिभाओं की प्रतिभा निश्चित रूप से निखरेगी।

@ पेरी चंद्रशेखर (सचिव रायपुर जिला शतरंज संघ)

शतरंज के विकास में यह पाठशाला मील का पत्थर साबित होगी। पाठशाला से जुड़कर विद्यार्थी शतरंज की बारीकियों से अवगत होंगे।।

@मनोज वर्मा (विक्रम एवार्ड से सम्मानित शतरंज खिलाड़ी)

शतरंज की पाठशाला पूरे राज्य में ही नहीं अपितु पूरे भारत देश में शतरंज के विकास हेतु किया गया एक अनूठा, अभिनव एवं अनुकरणीय प्रयास है। हेमंत खुटे जी द्वारा संचालित यह पाठशाला एक अत्यंत सराहनीय कदम है।

ग्रामीण अंचल के बच्चे को शतरंज खेल के मुख्यधारा में जोड़ना, उनके बौद्धिक विकास को एक रचनात्मक आयाम प्रदान करना एक प्रशंसनीय समाज सेवा है ।मैं इस पाठशाला साला कार्यक्रम की शुभकामनाएं देता हूं । मेरी तरफ से, हरसंभव सहयोग के लिए सदैव तत्पर हूँ।

@ रविकुमार (फीडे आर्बिटर एवं कोच)

हेमन्त भैया का शानदार प्रयास।शतरंज की पाठशाला एक कला है जिसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का एक असाधारण प्रयास है।

@रोहित यादव (फीडे इंस्ट्रक्टर)

शतरंज की पाठशाला से बच्चे न केवल खेल में आगे बढ़ेंगे बल्कि पढ़ाई में भी तेज़ होंगे।

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