मानवाधिकार की रूपरेखा और कसौटी को बदल रही प्रेस की स्वतंत्रता: एके सीकरी

''डिजिटल युग में प्रेस की स्वतंत्रता'' विषय पर चर्चा को संबोधित

नई दिल्ली: लॉएशिया के सम्मेलन में रविवार को ”डिजिटल युग में प्रेस की स्वतंत्रता” विषय पर चर्चा को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति एके सीकरी ने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता नागरिक और मानवाधिकार की रूप-रेखा और कसौटी को बदल रही है और मीडिया ट्रायल का मौजूदा रुझान उसकी एक मिसाल है.

एके सीकरी ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया दबाव में है और किसी मामले पर सुनवाई शुरू होने से पहले ही लोग बहस करने लग जाते हैं कि इसका फैसला क्या आना चाहिए. इसका न्यायाधीशों पर प्रभाव पड़ता है.

उन्होंने कहा, ”मीडिया ट्रायल पहले भी होते थे. लेकिन आज जो हो रहा है वह यह कि जैसे की कोई मुद्दा बुलंद किया जाता है, एक याचिका दायर कर दी जाती है. इस (याचिका) पर सुनवाई शुरू होने से पहले ही लोग यह चर्चा शुरू कर देते हैं कि इसका फैसला क्या होना चाहिए.

यह नहीं कि फैसला क्या ‘है’, (बल्कि) फैसला क्या होना चाहिए. और मेरा तजुर्बा है कि न्यायाधीश कैसे किसी मामले का फैसला करता है, इसका इस पर प्रभाव पड़ता है.”

न्यायमूर्ति सीकरी ने कहा, ”यह सुप्रीम कोर्ट में ज्यादा नहीं है क्योंकि जब तक वे सुप्रीम कोर्ट में पहुंचते हैं वे काफी परिपक्व हो जाते हैं और वे जानते हैं कि मीडिया में चाहे जो भी हो रहा है उन्हें कानून के आधार पर मामले का फैसला कैसे करना है. आज न्यायिक प्रक्रिया दबाव में है.”

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