अवैधानिक कार्य रोकने पुलिस के रात्रिकालीन गश्ती दल को दी जानी चाहिए स्वतंत्रता

मनीष शर्मा

मुंगेली।

जिले में शहर के साथ ही साथ ग्रामीण अंचलों में भी जहां-तहां आसानी से क्षेत्र वासियों के लिये आपराधिक घटनाओं व अवैध शराब उपलब्ध हो रही है। मुंगेली जिले के सभी ब्लाको के गांव गांव स्थिति यह है कि देर रात को किसी को पीने के लिये भले ही पानी न मिले लेकिन उसे शराब सहज रूप में ही उपलब्ध हो जाती है। ऐसा नहीं है कि आबकारी एवं पुलिस विभाग की जानकारी में यह बात न हो लेकिन उसके द्वारा इस संबंध में कोई कार्यवाही न किया जाना विस्मयकारी है।

मुंगेली शहर की ही बात कर ली जाये तो शहर भीतर अनेक ठिकानों पर देर रात तक ही नही बल्कि दूसरे दिन शराब दुकान खुलने तक शराबियों खुलेआम शराब उपलब्ध हो रही है। यह सिलसिला आज का नहीं बल्कि कई वर्षों से चला आ रहा है उसके बाद भी आबकारी विभाग की नजर में यह बात कभी न आना कई सवालों को जन्म देता है कि शराब की बिक्री शहर के बीचों बीच दो वैध दुकान के अलावा अवैध रूप से कैसे बेची जा रही है।

रात्रि में पुलिस की गश्त रात में होते हुए देखी तो जा सकती है लेकिन इस गश्ती दल की नजर या तो इस तरह से अवैध रूप से हो रही शराब की बिक्री, अवैध जुएं के संचालन पर नहीं पड़ पाती है और या फिर उस गश्ती दल को ये हिदायत दी गयी होगी कि उस तरफ नजर नहीं डालना है जहाँ से शराब की बिक्री ,अवैध जुआं का अडडा चल रहा है।

इस तरह पुलिस की रात्रि कालीन गश्ती पर सवाल उठना भी लाजिमी है वहीं इस गश्ती दल के द्वारा देर रात राहगीरों के साथ पूछताछ रूपी रस्म को अदा करते हुए भी देखा जा सकता है।दरअसल,तंत्र में कसावट की जरूरत मुंगेली वासियों के द्वारा वर्षों से महसूस की जा रही है जिसके अभाव में इस तरह की असामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला हुआ है।

पुलिस के गश्ती दल को स्वतंत्र किया जाना चाहिये कि उसके द्वारा जिस भी आपत्तिजनक कार्य पर नजर पड़े या उसकी जानकारी में आये उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही,पुलिस के द्वारा की जाये।अभी हो ये रहा है कि पुलिस कर्मी अपनी रातों की नींद तो खराब करते ही हैं लेकिन शायद उनको किसी कार्यवाही के प्रति स्वतंत्र नहीं छोड़ा गया है।

ऐसे में रात्रिकालीन गश्ती की क्या अहमियत रह जाती है जब गश्तीदल के सदस्य,किसी कार्यवाही को अपने विवेक से अंजाम ही न दे पायें। मुझे इसी तरह की व्यवस्थाओं से शिकायत है जहां आबकारी जैसे महत्वपूर्ण विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठे हों और उसका काम भी पुलिस को ही करना पड़ रहा हो।

वास्तव में मेरा ऐसा मानना है कि यदि पुलिस के गश्ती दल को ही कार्यवाही करने के लिये स्वतंत्र छोड़ दिया जाये तो रात में अवैध रूप से बेची जाने वाली शराब , देर रात जगह जगह संचालित हो रहे जुएं के अड्डो पर तो रोक लगायी ही जा सकती है। जुए अड्डे,शराब की यदि अवैध बिक्री पर यदि रोक लगायी जाती है तो उसके कई अच्छे परिणाम भी सामने आयेंगे ही आयेंगे क्योंकि किसी भी अपराध के मूल में जुआं, शराब भी एक ऐसा तत्व है जो असामाजिक गतिविधियों को जन्म देने के लिये पर्याप्त होती है।

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