मजदूर से कलाकार बन तेजू बहन ने किताब में दिखाया अपना सफर

उनकी पेंटिंग को विदेशों में भी सराहा जा रहा है

मजदूर से कलाकार बन तेजू बहन ने किताब में दिखाया अपना सफर

कला और संगीत दो ऐसे माध्यम हैं जो हर मजहब और हर तबके के लिए उपलब्ध हैं, कला किसी से भेदभाव नहीं करती। यह पंक्ति गुजरात-राजस्थान सीमा पर रहने वाली तेजू बहन के लिए सटीक है। तेजू जो कभी मजदूरी करती थीं, आज अपने क्षेत्र में अपनी कला के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी पेंटिंग को विदेशों में भी सराहा जा रहा है। हाल ही में उनकी पिक्चर बुक के नए संस्करण ड्राइंग फ्रॉम द सिटी की लॉन्चिंग हुई।

इस किताब की खास बात यह है कि इसमें एक ओर तेजू बेहन ने अपने अब तक के सफर को कला के जरिए दिखाया है तो दूसरी ओर ऐसा संसार बनाया है जिसे उन्होंने खुद कभी नहीं जिया। इसमें महिलाएं बाइक चला रही हैं और अंतरिक्ष में जा रही हैं। 58 साल की तेजू बहन, जब 17 साल की उम्र में शादी कर अपने पति के साथ अहमदाबाद आई थीं तो उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन उनकी जिंदगी उनकी कला के इर्द-गिर्द होगी। तब वह दैनिक मजदूर थीं और सीवेज के लिए गड्ढा खुदाई और पानी के पाइप लगाने का काम करती थीं। उन दिनों तेजू की एक दिन की कमाई महज पांच रुपये थी।

तेजू बताती हैं, ‘मेरे पति गणेश जोगी पारंपरिक भजन गायकों के परिवार से ताल्लुक रखते हैं। होटल और मेले में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम में गाने से हमारे घर का खर्चा चलता था। फिर एख दिन हकू शाह नाम के एक कलाकार ने पति की क्षमता से प्रभावित होते हुए 6 रुपये प्रति दिन आमदनी देने की बात कही। हमें लगा कि यह कोई मेहनत मजदूरी का काम होगा लेकिन जब उन्होंने मेरे पति को एक पेन और पेपर देकर कुछ बनाने को कहा तो हम हैरान रह गए।

कला के माध्यम से मजदूर से कलाकार बनने तक का सफर
तेजू ने आगे कहा कि शाह ने हमें मनाने की कोशिश की और कहा कि जो व्यक्ति पौराणिक गीत गा सकता है वह उसे ब्रश और रंगों के जरिए कागज पर भी उभार सकता है। इसके बाद से कला हमारे परिवार से जुड़ गई। पति के बाद मैंने, और फिर बेटे-बहू भी इसमें शामिल हो गए और अब नाती-पोते भी इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। किताब में तेजू बहन के एक मजदूर से कलाकार बनने के सफर को कला के माध्यम से दिखाया गया है।

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