छत्तीसगढ़

राष्ट्रीय कार्यशाला में `छत्तीसगढ़ मॉडल` की जमकर हुई तारीफ

रायपुर : केन्द्र सरकार की ओर से सोमवार को नई दिल्ली में लघु वनोपज के संग्रहण प्रसंस्करण और विपण पर राष्ट्रीय कार्यशाला हुई। यह कार्यशाला केन्द्रीय जनजातीय मामलों के मंत्रालय और केन्द्र की संस्था ट्राइबल को-ऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन `ट्राईफेड` के संयुक्त तत्वावधान में हुई । लोगों ने इस दौरान छत्तीसगढ़ मॉडल को जमकर सराहा।
कार्यशाला में लघु वनोपजों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य नीति के अनुरूप देश के विभिन्न राज्यों में आदिवासियों को उचित और न्याय संगत मूल्य दिलवाने आगामी रणनीति पर विचार विमर्श किया गया। इसके साथ ही लघु वनोपजों के प्रसंस्करण उद्योगों की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। केन्द्रीय आदिवासी मामलों के मंत्री जुएल ओराम ने कार्यशाला का शुभारंभ किया।
इस दौरान प्रधान मुख्य वन संरक्षक और राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के प्रबंध संचालक मुदित कुमार सिंह ने छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से प्रस्तुतिकरण दिया। लघु वनोपज के संग्रहण, प्रसंस्करण और उनकी विपणन प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ की भूमिका को देशभर से आए प्रतिभागियों ने सराहा। प्रस्तुतिकरण में बताया गया कि छत्तीसगढ़ में संयुक्त वन प्रबंधन योजना के तहत वन क्षेत्रों के ग्रामीणों की सात हजार 887 वन प्रबंधन समितियों का गठन किया गया है। इनमें 27 लाख 63 हजार सदस्य हैं। इनमें महिला सदस्यों की संख्या 14 लाख 36 हजार है। वन क्षेत्रों की सीमा के पांच किलोमीटर भीतर के लगभग ग्यारह हजार गांव इन समितियों के कार्यक्षेत्र में शामिल है। जिन्हें 33 हजार 190 वर्ग किलोमीटर के इलाके में वनों की देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस मौके पर केन्द्रीय आदिवासी मामलों के राज्य मंत्री द्वय जसवंत सिंह भाभोर और सुदर्शन भगत विशेष रूप से उपस्थित थे।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.