भावी इंजीनियरों से विश्वेश्वरैया के मार्ग पर चलने का आह्वान : संजय श्रीवास्तव

रायपुर।

भारतरत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के जयंती के अवसर पर सिविल लाईन न्यू सर्किट हाउस के पास अभियंता दिवस का आयोजन किया गया। जिसमें रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव जी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

इस कार्यक्रम के अवसर पर उपस्थित सभी अतिथियों ने विश्वेश्वरैया की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके प्रति श्रध्दा-सुमन अर्पित करते हुए कार्यक्रम की शुरुआत की।

श्रीवास्तव ने भारत के निर्माण में श्री विश्वेश्वरय्या जी द्वारा दिए गए योगदानों को याद करते हुए कहा कि वे एक प्रख्यात इंजीनियर और राजनेता थे, जिन्होने आधुनिक भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिसे देखते हुए उन्हें वर्ष 1955 में भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

उन्होने आगे अपने वक्तव्य में आज के इंजीनियरों से अव्हान करते हुए कहा कि सभी को विश्वेश्वरय्या जी से प्रेरित होते हुए अपने कार्य को पूरी लगन और निष्ठापूर्वक करते हुए प्रदेष एवं राष्ट्र के निर्माण में अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

श्री श्रीवास्तव ने कहा एक अभियंता का मुख्य कार्य होता है समस्याओं का समाधान करना । इसके लिए उन्हें प्रायः उच्च शिक्षा में पाए हुए अपने प्रशिक्षण और तकनीक का अनुप्रयोग करना पड़ता है। अधिकतर अभियंता अभियात्रिकी की किसी एक शाखा में प्रशिक्षण तथा प्राप्त होते है।

श्रीवास्तव ने कहा कि भारतरत्न एम. विश्वेश्रैया का व्यक्तित्व एवं कृतत्व अभियंता समुदाय के लिए अनुकरणीय है एवं सदा प्ररेणा का श्रोत रहेगा। विश्वेश्रैया को उनके कार्य दक्षता को देखते हुए उन्हें भारत के सर्वोच्च सम्मान भारतरत्न से सम्मानित किया गया था। जन हित में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा था। उनके बताये रास्ते पर चलकर ही उन्हें सच्ची श्रंद्धाजंली दी जा सकती है।

आज के दिन हम एक जगह एकत्रित हो विश्वेश्वरैया के बताये रास्ते पर चलने का संकल्प लेते है। हम अभियंता उनके रास्ते पर चलकर ही देश को आगे बढ़ाने में सहयोग प्रदान करते है।

इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से संयोजक पी.एन0सिंह, ए.के बाजपेयी, पी.के.खरे, सी.पी.शर्मा, एस.डीतेलाम, अनिल शर्मा, डी.एस.परिहार, डी.एल.देवांगन, आर.के.जैन, जीवन अग्रवाल, आर.ए पाठक , राजेश शर्मा, सुनिल देशकर, महेश कक्ड़ आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

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