कश्मीर राज्य का भविष्य – कुंडली अध्ययन

रायपुर: एक समय था कि कश्मीर को धरती पर स्वर्ग का नाम दिया जाता था। दुर्भाग्य से कुछ दशकों से यह स्वर्ग नर्क में तबदील हो चुका है। पडौसी शत्रु देश के कारनामों की वजह से आज भारत के कश्मीर की स्थिति बद से बद्तर हो चुकी है। कश्मीर राज्य संपूर्ण भारत में एक मात्र ऎसा राज्य है जिसे लेकर नित्य विवाद, राजनीति, दंगे-फसाद और आतंकवादी गतिविधियां सामने आती रहती है। कश्मीर राज्य जहां एक ओर अपनी खूबसुरत वादियों के लिए जाना जाता है, वहीं सैंकड़ों विवाद इस राज्य के साथ जुड़े है।

या यूं कहें की इस राज्य के किस्मत में शांति और सुख है ही नहीं। पुलवामा अटैक, पत्थरबाज, सेना पर अटैक और अलगाववादियों के सहयोग से राज्य में शांति को कायम ही नहीं रहने देते है। कश्मीर राज्य को समझने से पूर्व इस राज्य के अतीत में झांक लेते है। कालांतर में कश्मीर पर मुगलों का शासन रहा, इसके बाद अफगानी आए, कुछ समय बाद रणजीत सिंह ने अफगानियों को हरा कर अपना शासन स्थापित कर लिया। रणजीत सिंह की मृत्यु होने के बाद यहां महाराजा गुलाब सिंह का राज रहा। पिछ्ले ७० वर्षों से भारत ने अपनी सेना कश्मीर से नहीं हटाई है। इसी तरह कश्मीर बार्डर्स से पाकिस्तान की सेनाएं भी नहीं हटाएं गई है।

कश्मीर में धारा 370

जब भी कश्मीर राज्य का जिक्र आता है, उस समय धारा 370 का जिक्र अवश्य आता है, आखिर धारा 370 क्या हैं, इस धारा ने किस प्रकार कश्मीर को देश के अन्य राज्यों से अलग कर दिया है। सबसे पहले हम सभी को यह जान लेना चाहिए कि धारा 370 भारतीय संविधान की एक धारा मात्र है। न कि कोई स्वतंत्र संविधान है। भारतीय संविधान का एक भाग होने के कारण इसमें बदलाव करना संभव है। सरल शब्दों में कहें तो यह संविधान में इस धारा के नाम से एक आलेख है। जिसमें इस धारा की व्याख्या की गई है। धारा में कश्मीर राज्य को विशेष राज्य मानते हुए कुछ खास तरक की छूट दी गई है। यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस धारा के आलेख में स्पष्ट रुप से कहा गया है कि यह छूट अस्थायी है।

इसके अतिरिक्त इस आलेख में यह भी कहा गया है कि जम्मू कश्मीर में कानून बनाने का अधिकार केवल स्टेट असेंबली को हैं, केंद्र सरकार को भी इस विषय में कानून बनाने से पहले स्टेट असेंबली से पास कराना होगा, देश के अन्य राज्यों का कोई व्यक्ति यहां स्थायी निवास नहीं कर सकता अर्थात अचल संपत्ति खरीब कर नहीं रख सकता।1990 से कश्मीरी पंडितों को यहां विरोध और हिंसा का सामना करना पड़ा। उस समय जो यहां अराजकता और अव्यवथा शुरु हुई, आतंकवादी गुरुप सक्रिय हुए, अलगाववाद ने सिर उठाना शुरु किया और शत्रु देशों ने इस स्थिति का लाभ उठाकर, राज्य की अशांति को बढ़ाया तब से लेकर आज तक गोलीबारी, बम ब्लास्ट, पत्थर बाजी और सेना पर हमले भी यहां हो रहे है। देश के इस राज्य से सबसे अधिक सीज फायर के उल्लंघन की खबरें सुनने को मिलती है।

इसी राज्य के साथ ऐसा क्यों हो रहा हैं, आज इसका विश्लेषण हम कुंडली विश्लेषण से करने जा रहे हैं –

26 अक्तूबर 1947, 00:00, जम्मू कश्मीर, श्रीनगर

कश्मीर राज्य की कुंडली कर्क लग्न और कुम्भ राशि की है। वर्तमान में शुक्र महादशा में शनि की अंतर्द्शा चल रही है। महादशानाथ शुक्र इनके लिए चतुर्थेश और आयेश है। एवं अंतर्द्शानाथ शनि सप्तमेश व अष्टमेश हैं और लग्न भाव में स्थित है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र यह कहता है कि अष्टमेश का लग्न भाव में होना अशुभ और आयु में दोष देता है। अष्टम भाव बाधाओं, रुकावटों और दिक्कतों का भाव होने के कारण यह जिस भाव/भावेश से संबंध बनाता है उसमें अशुभता लाता है। लग्न भाव में अष्टमेश की स्थिति तनाव, विवाद और अशांति की स्थिति देती है। शनि इस लग्न के लिए मारकेश भी होते हैं, और मारकेश एवं अष्टमेश दोनों होने के कारण अधिक अशुभ हो गए है। यहां लग्न भाव में शनि-मंगल का योग इन विवादों को बढ़ा रहा है। दोनों ग्रह द्वादशेश बुध के नक्षत्र में है। एकादश भाव में राहु की स्थिति, महत्वकांक्षाओं के चलते राजनीतिकरण की स्थिति देती है। इस स्थिति में राजनेता व्यक्तिगत हितों की पूर्ति के लिए बाकि सब को किनारे रख सकता है।

सत्ता कारक ग्रह सूर्य यहां नीचस्थ है और तॄतीयेश व द्वाद्शेश बुध के साथ चतुर्थ भाव में युति संबंध में है। सत्ता कारक ग्रह राहु ग्रह के नक्षत्र में होने के कारण स्वार्थ की राजनीति का संकेत दे रहा है। लग्न भाव का स्वामी चंद्र भी राहु के नक्षत्र में है। सूर्य और चंद्र दोनों प्रकाशवान ग्रह है। सूर्य आत्मा है तो चंद्र मन है। दोनों का राहु के नक्षत्र में होना इनके फलों को दूषित कर रहा है और इनके फलों में राहु का प्रभाव आ रहा है।

वैदिक ज्योतिष में राहु ग्रह अवसरवादी ग्रह कहा गहा है। नियम कानूनों का अपने स्वार्थ व अवसर के अनुसार प्रयोग करने वाला राहु है। जहां राहु ग्रह का प्रभाव आ जाता है, वहां धोखा, फरेब और चातुर्य आ ही जाता है। यही कारण है कि इस राज्य की राजनीति व्यक्तिगत हितों के कारण अत्यधिक दूषित हो गई है। शुक्र स्वराशि तुला में चतुर्थ भाव में स्थित हैं जो इस राज्य को बेहद खूबसुरत बना रहा है, इसे धरती पर स्वर्ग का दर्जा दिला रहा है। कुंडली का चतुर्थ भाग जिसे सुख-शांति का भाव कहा गया है, वह अत्यधिक पीड़ित हैं।

चतुर्थ भाव में द्वादशेश बुध, मारकेश सूर्य की युति है और योगकारक मंगल की चतुर्थ दॄष्टि भी है। जो इस राज्य की शांति को स्थापित नहीं होने दे रही है। सुख भाव का कारक ग्रह शुक्र स्वयं है यहां कारक अपने भाव का नाश कर रहा है। ऐसे में इस राज्य में शांति स्थापित करना सरल कार्य नहीं है। इस समय की अंतर्द्शा षष्टेश की दशा होने के कारण विवाद, विरोध बढ़ने की संभावनाएं बन रही है। गोचर में शनि भी इस समय इसके शत्रु भाव पर गोचर कर रहा है, वहां गोचर में शनि को केतु का साथ मिल रहा है और द्वादश भाव पर राहु-मंगल दोनों एक साथ 07 मई से 22 जून 2019 तक एक साथ रहेंगे। यह समय इस राज्य के लिए प्रतिकूल बना हुआ है। शत्रुओं से सावधान रहना, उत्तम रहेगा। अन्यथा पड़ौसी देश बड़ी हानि कर सकते है।

ज्योतिष आचार्या रेखा
कल्पदेव
8178677715

Back to top button