CBSE की गलती के कारण खतरे में पड़ा हजारों स्टूडेंट्स का भविष्य

नई दिल्ली : सीबीएसई की ओर से जारी परीक्षाओं के री -वैल्युएशन के नतीजे घोषित होने के बाद कई खामियां सामने आई है। पुनर्मुल्यांकन के नतीजे आने के बाद विद्यार्थियों के 50 फीसदी से अधिक के रिजल्ट में बदलाव हुआ है, जिससे कई नए टॉपर्स सामने आए हैं।

66,876 स्टूडेंट्स ने किया था आवेदन : सीबीएसई की ओर से जारी की गई जानकारी के अनुसार 66,876 विद्यार्थियों ने फर्स्ट स्टेज वेरिफिकेशन प्रोसेस के लिए आवेदन किया है। जिसमें से 4632 विद्यार्थियों के नंबरों में ही बदलाव किया गया है, जो कि आवेदन करने वाले उम्मीदवारों का 6.9 फीसदी है। इसमें भी सिर्फ 3200 उम्मीदवारों के नंबर्स बढ़ाए गए हैं, जबकि कई उम्मीदवारों के अंक कम हुए हैं।

अंकों में अंतर के 4 हजार से ज्यादा मामले : इस बारे में (सीबीएसई) ने कहा कि बारहवीं कक्षा की परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं को फिर से जांचने पर चार हजार से अधिक मामलों में अंकों में अंतर आया है। सीबीएसई के सचिव अनुराग त्रिपाठी ने कहा, बारहवीं कक्षा की 61 लाख से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं को जांचा गया जिसमें से पहले चरण की सत्यापन प्रक्रिया के लिए 66876 आवेदन थे।

अंतत : केवल 4632 मामलों में अंकों में बदलाव आया जो कुल जांची गईं उत्तर पुस्तिकाओं का केवल 0.075 प्रतिशत है। हर पेपर को चेक करने के लिए 2 टीचर्स को रखा गया और इसमें 99.6 पर्सेंट कॉपियों को सही तरीके से दोबारा चेक किया गया। उन्होंने बताया कि लगभग 50,000 टीचरों ने 61.34 लाख कॉपियों को चेक किया।

शिक्षकों के खिलाफ कारवाई शुरु : जांच में गलतियों को लेकर आलोचना का शिकार सीबीएसई ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि लापरवाही से कॉपियां जांचने पर 214 से अधिक शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। उन्होंने कहा, बोर्ड ने लापरवाही से कॉपी जांचने के लिए 214 शिक्षकों के खिलाफ निलंबन और कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। मानवीय गलती को कम से कम करने के लिए, सीबीएसई शिक्षकों, जांच करने वालों के प्रशिक्षण तथा तकनीकी हस्तक्षेप से प्रणाली को और मजबूत करेगी।

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