कांग्रेस प्रत्याशी नाना पटोले के सामने फंसे गडकरी, मोदी-शाह की नहीं हुई एक भी रैली

गडकरी ने पीएम मोदी को यहां रैली करने की भी कभी प्रार्थना नहीं की

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता व परिवहन व जलरानी मंत्री नितिन गडकरी अपनी नागपुर सीट को बचाने के लिए कांग्रेस प्रत्याशी नाना पटोले जिसने कभी कोई चुनाव नहीं हारा, के सामने कड़े मुकाबले में फंसे हैं। जिससे कि यहाँ के चुनाव प्रचार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की अनुपस्थिति के कई अर्थ लगाए जा रहे हैं।

यहां मोदी ने कोई भी रैली क्यों नहीं की, यह अभी तक रहस्य बना हुआ है। पर भाजपा सूत्र कह रहे हैं कि गडकरी ने उन्हें यहां रैली करने की कभी प्रार्थना नहीं की, लेकिन अमित शाह ने यहां एक बैठक को संबोधित जरूर किया। हालांकि इस बात पर कोई सफाई अभी तक नहीं दी गई है कि क्यों केंद्रीय हाईकमान ने प्रिंट व टैलीवीजन पर एक भी विज्ञापन नागपुर में जारी नहीं किया। बावजूद इसके गडकरी किसी की परवाह नहीं करते।

जब मोदी ने उन्हें कहा कि वह नामांकन के दिन वाराणसी में उनके साथ रहें, तब गडकरी ने उनकी मांग को मान लिया। वास्तव में मोदी ने गडकरी को बिना कारण के नहीं बुलाया। मोदी उस दिन भाजपा के सभी सहयोगियों व पार्टी की कोर कमेटी के सभी सदस्यों की उपस्थिति को यकीनी बनाना चाहते थे।

भाजपा की कोर कमेटी में गडकरी के अतिरिक्त राजनाथ सिंह, अमित शाह, सुषमा स्वराज व जेतली शामिल हैं। जेतली अपनी खराब सेहत के चलते नहीं आ पाए। मोदी ने गडकरी को रोड शो में भी शामिल होने के लिए बुलाया था। सुषमा को छोड़कर कुछ देर के लिए सभी ने वहां अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

मोदी ने छूए अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल के पांव

इस दौरान मोदी ने अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल के पांव छू कर सभी को हैरान कर दिया। मोदी के नामांकन में एन.एन.डी.ए. के चेयरमैन हेमंत बिस्व सरमा, लोजपा चीफ रामविलास पासवान, शिवसेना, जद-यू व ए.आई.ए.डी.एम.के. सभी आए थे। मोदी गडकरी को बहुत पसंद नहीं करते हैं क्योंकि पार्टी व सहयोगियों के अंदर उनकी ख्याति अच्छी-खासी है। यहां तक कि देशभर में वह एक स्वीकार्य चेहरा बन गए हैं।

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