मानवीय गतिविधियों में कमी से स्वच्छ हुई गंगा

गोमुख से गंगासागर तक चलाया जा रहा स्वच्छता अभियान

दिल्ली: भारतीय संस्कृति में नदियां प्रागैतिहासिक धर्म और मान्यता का अटूट हिस्सा रही हैं। करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास की प्रतीक इन नदियों की साफ-सफाई के लिए वैसे तो सरकार अपने स्तर पर सतत प्रयास कर रही है, लेकिन कोरोना काल में मानवीय गतिविधियां सीमित होने से न केवल नदियों में बल्कि प्राकृतिक खूबसूरती में भी सकारात्मक बदलाव देखा गया है।

मानवीय गतिविधियों में कमी से गंगा हुई निर्मल

कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान सबसे खूबसूरत प्रभाव हमारी नदियों पर पड़ा है। जीवनदायिनी नदियां इस दौरान जितनी साफ दिखी हैं, उतनी शायद कभी नहीं दिखी हैं। घाट पर बहती हुई गंगा जितनी निर्मल नजर आ रही हैं, उतनी ही अविरल व शांत होकर बह रही हैं। इसकी मुख्य वजह है लॉकडाउन के दौरान गंगा के आस-पास मानवीय गतिविधियों में कमी।

गंगा में आए बदलाव पर आध्यात्मिक गुरु स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि कोरोना ने हमें जो संदेश दिया है उसे समझना होगा। हमें जागना होगा नहीं तो बहुत देर हो जाएगी।
पवित्र गंगा नदी की सफाई को लेकर गंगा विचार मंच द्वारा देश के जिन-जिन राज्यों से गंगा मइया से प्रवाह होता है वहीं घाटों पर जाकर साफ-सफाई का अभियान चलाया जा रहा है।

गोमुख से गंगासागर तक चलाया जा रहा स्वच्छता अभियान

इस बारे में नमामि गंगे के तहत गंगा विचार मंच के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. भरत पाठक कहते हैं कि गंगा जी के उद्गम से लेकर गंगासागर तक जितने भी घाट बने हुए हैं, उन घाटों पर गंगा विचार मंच के कार्यकर्ताओं ने स्वयंसेवक तैयार किए और कई स्थान ऐसे जैसे ऋषिकेश, हरिद्वार, बिजनौर, कानपुर का अटल घाट, काशी का दशाश्वमेध घाट, प्रयागराज घाट, बक्सर का रमरेखा घाट, हुगली के घाट समेत कई कई घाटों पर गंगा विचार मंच के कार्यकर्ता नियमित रूप से लोगों को जुटा कर स्वच्छता अभियान चलाते हैं। इसका परिणाम भी दिख रहा है, लोग जागरूक हुए हैं।

लॉकडाउन के चलते प्रकृति के स्तर पर कई अन्य तरह के फायदे भी सामने आए हैं। नदियां साफ होने के साथ ही देश के कई हिस्सों में लुप्तप्राय वन्य जीव भी देखने को मिले हैं।

अन्य नदियों की सफाई के लिए भी चल रही योजनाएं

भारतीय संस्कृति में आदिकाल से नदियां हमारी सांस्कृतिक विरासता का महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए देश और दुनिया के करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास की प्रतीक जीवनदायिनी मां गंगा की स्वच्छता के लिए भारत सरकार ने जहां नमानि गंगे अभियान चलाया है वहीं अन्य नदियों की सफाई के लिए भी कई तरह की योजनाएं चला कर इनकी स्वच्छता, निर्मलता और अविरलता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है।

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