गंगानगर में जियो कर रहा मनमानी, कॉलोनी में टॉवर-परेशानी में जान

आपत्ति के निराकरण के बिना जीडीए से अनुमति दिए जाने की शिकायत करेंगे वार्डवासी

कन्हैया केशरवानी
बिलासपुर। शहर के वार्ड क्रमांक 1 , 36 माल के पीछे गंगानगर सेक्टर 2 रिहायसी ईलाके के बीचों बीच बिना आपत्ति बुलाए मोबाइल टावर लगाए जाने से लोगों में गुस्सा बढ़ रहा है। बता दें यहां मकान मालिक प्रसन्न कुमार शर्मा के मकान में जियो कंपनी द्वारा मोबाइल टॉवर लगाया जा रहा है। बता दें कि लोगों की दावा आपत्ति को ताक पर रखकर टावर लगाए जाने से टावर के पास रहने वाले लोग परेशान हो रहे हैं। वहीं मकान मालिक नीजि लाभ के लिए वार्डवासियों की सुरक्षा को अनदेखा किया जा रहा है।

इस मामले में वार्डवासियों ने यहां रहने वाले कन्हैया केशरवानी के साथ सुषमा सिंह ठाकुर, नीरा सिंह ठाकुर, शीतला सिंह ठाकुर, अंजली सिंह, रामकुमारी बाई, संतोषी बाई, गिरजा वर्मा, उमा बाई, अमिता शर्मा,, प्रताप सिंह ठाकुर, निखिल तिवारी, दीपक सिंह ठाकुर, निर्मल साहू , राजेश्वर सिंह, दुर्गेश सिंह , रामनिवास ठाकुर, चिन्टु गुप्ता, दीपक मैत्री, सिमरन चतरथ, अमितेश सिंह ठाकुर, हनिफ खान, गंगानगर महिला समिति ,विकास समिति,राजपूत क्षत्रिय समाज के करीब 50 से ज्यादा महिला पुरुषों ने निगम दफ्तर पहुंचकर मोबाइल टावर लगाए जाने का विरोध किया और ज्ञापन भी सौंपा है।

बता दें कि मोबाइल टावर लगाए जाने से पहले वार्डवासियों से सहमति भी नहीं ली गई है। जबकि नियमानुसार मोबाइल टावर के रेडिएशन से दायरे में शामिल लोगों से सहमति लिया जाना जरूरी है। बिना अनुमति टावर लगाया जाना नियम विरुध है। बता दें कि बिलासपुर शहर में जियो टावर के इंचार्ज सोम शेखर से बात करने पर वो फोन उठाना ही बंद कर दिया है। वाई वासियों का कहना है कि जीडीए बिना जांच पड़ताल के घनी आबादी वाली एरिया में मोबाइल टावर लगाने की परमिशन दे देता है, टावर की लोकेशन के आसपास कई स्कूल है, जिससे रेडिएशन का असर बच्चों पर पड़ने का खतरा है।

इलेक्टोमैग्नेटिक वेव्स हैं खतरनाक
मोबाइल टावर से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स कैंसर का कारण बनती है, इस रेडिएषन से जानवरों पर भी असर पड़ता है, यही वजह है कि जिस एरिया में मोबाइल टावरों की संख्या अधिक होती है, वहां पक्षियों की संख्या कम हो जाती है, ग्रामीण अंचल में इसी वजह से मधुमक्खियां समाप्त हो गई है,

किस एरिया में नुकसान सबसे ज्यादा
एक्सपर्ट्स की मानें तो मोबाइल टावर के 300 मीटर एरिया में सबसे ज्यादा रेडिएषन होता है, एंटेना के सामने वाले हिस्से में सबसे ज्यादा तरंगें निकलती है , जाहिर है, सामने की ओर ही नुकसान भी ज्यादा होता है, मोबाइल टावर से होने वाले नुकसान में यह बात भी अहमियत रखती है, कि घर टावर पर लगे ऐंटेना के सामने है, या पीछे, टावर के एक मीटर के एरिया में 100 गुना ज्यादा रेडिएषन होता है, टावर पर जितने ज्यादा एंटेना लगे होंगे, रेडिएषन भी उतना ज्यादा होगा।

new jindal advt tree advt
Back to top button