आरटीई को लेकर प्रदेश में जागरूकता लाने की जरुरत : गौतम बंदोपाध्याय

आरटीई को लेकर प्रदेश में जागरूकता लाने की जरुरत : गौतम बंदोपाध्याय

रायपुर : छत्तीसगढ़ में आरटीई के तहत गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश देने के जो आकडे सरकार ने विधानसभा में पेश किये है वो चौकाने वाले हैं.

शिक्षा मंत्री केदार कश्यप ने खुद ही बताया है कि प्रदेश में आरटीई के तहत गरीब बच्चों का पचास फीसदी ही प्रवेश हो पाया है. इस आकडे के आने के बाद आरटीई को लेकर सरकार को जवाबदारी पर एक नयी बहस छिड़ गई है.

लोगों का मानना है कि सरकार खुद इस ओर ध्यान नहीं दे रही है जिसके चलते गरीब बच्चे कानून बनने के बाद भी अच्छे स्कूलों में पढाई नहीं कर पा रहे हैं.

वहीँ सामाजिक कार्यकर्ता मानते है कि सरकार और प्रशासन ने इस ओर गौर नहीं किया और प्रचार प्रसार में कमी कर दी जिसके चलते बच्चों का प्रवेश निजी स्कूलों में नहीं हो पाया है.

सामाजिक कार्यकर्ता गौतम बंदोपाध्याय ने क्लिप्पेर28 से चर्चा करते हुए बताया कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन खुद प्रचार प्रसार करने में ध्यान नहीं देती है जिसके कारण लोगों में जागरूकता की कमी है और लोग अपने बच्चो का आरटीई के तहत भर्ती नहीं करा पाते हैं.

उन्होंने कहा कि सरकार को आम लोगों के बीच जाकर इस योजना के बारे में जानकारी देनी चहिये जिससे उनमे जागरूकता आये और गरीब लोग अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने के लिए उनका प्रवेश कराए.

गौतम बंदोपाध्याय ने कहा कि सरकार जिन बच्चों का एडमिशन कराती है उनकी राशी भी सही तरीके से स्कूलों को नहीं मिल पाता है जिससे स्कूलों में भी नाराजगी होती है.

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