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गिलानी के नाती को सरकारी नौकरी मिलने पर घाटी में घट गई थी हिंसा : एनआईए

नई दिल्ली: बीते साल बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में पत्थरबाजी और हड़ताल का जो सिलसिला चला, वह नवंबर में आकर कुछ थम गया. एनआईए के मुताबिक उन दिनों की हिंसा को भड़काने में सैयद अहमद शाह गिलानी के दामाद अल्ताफ फंटूश का बड़ा हाथ रहा. जब नवंबर में गिलानी के दामाद के बेटे को सरकारी नौकरी मिल गई तो वह ठंडा पड़ गया.

एनआईए के मुताबिक नवंबर 2016 में अनीस उल इस्लाम को शेरे कश्मीर इंटरनेशनल सेंटर में प्रोजेक्ट मैनेजर की नौकरी मिली. जिस दिन इंटरव्यू था उस दिन हड़ताल थी. करीब 200 नौजवानों में से फंटूश के बेटे को चुना गया.

एनआईए को फंटूश ने अपनी पूछताछ में बताया है कि घाटी में हिंसा फैलाने के लिए जो पैसा सीमा पार से आता था उसकी जानकारी गिलानी के बेटे नईम और नसीम खान को भी थी. एनआईए ने नसीम को बुधवार को पूछताछ के लिए बुलाया है.

गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर ने रिपोर्टरों से कहा कि “कोई भी हो, भाई हो या बेटा हो, जिसके खिलाफ भी सबूत होगा कार्रवाई की जाएगी.” हालांकि एनआईए के जांच के तौर-तरीके से मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती खुश नहीं बताई जा रही हैं. सोमवार को केंद्रीय गृह सचिव ने उनसे मुलाकात कर जानकारी दी कि जांच में कई अहम सबूत मिले हैं.

बहरहाल एनआईए को यह जांच बहुत फूंक-फूंककर और पूरे सबूतों के साथ करनी होगी. उसे अहसास होगा कि जो इल्जाम वो लगा रही है, वह बहुत गंभीर किस्म के हैं और उसकी जरा सी चूक से माहौल बिगड़ सकता है. लेकिन एक सावधान कोशिश राज्य में आतंकवाद की कमर तोड़ भी सकती है.

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