ज्योतिष

मिथुन राशि वर्ष 2020

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव कुंडली विशेषज्ञ और प्रश्न शास्त्री 8178677715

ग्रह गोचर

इस वर्ष शनि 24 जनवरी को मकर राशि में अष्टम भाव में प्रवेश रहेंगे। वर्ष के प्रारम्भ में राहु मिथुन में प्रथम भाव में होंगे और 19 सितम्बर के बाद वृष राशि में द्वादश भाव में प्रवेश करेंगे। 30 मार्च को गुरु मकर राशि में अष्टम भाव में प्रवेश करेंगे एवं वक्री होकर 30 जून को घनु राशि में सप्तम भाव में गोचर करेंगे और फिर से मार्गी होकर 20 नवम्बर को मकर राशि में अष्टम भाव में आ जाएंगे। 31 मई से 8 जुन तक शुक्र अस्त रहेंगे।

व्यावसायिक

व्यवसाय की दृष्टि से वर्ष सामान्य रहेगा। सप्तम स्थान का गुरु व्यवसाय में सफलता व साझेदारी में सफलता का योग बन रहे हैं। यदि आप साझेदारी में कोई कार्य कर रहे हैं तो आपको इच्छित लाभ प्राप्त होगा और आप अपने साझेदार से संतुष्ट रहेंगे परन्तु अष्टमस्थ शनि के चलते आपको कुछ रुकावटों का सामना भी करना पड़ेगा। इस अवघि में कोई नया कार्य प्रारम्भ करेंगे, तो उसमें सफलता मिलने की सम्भावना कम है। आपको अनुभवी और वरिष्ठ व्यक्तियों का सहयोग तो मिलेगा परन्तु आप उसका पूरी तरह से लाभ नहीं उठा पायेंगे। 30 मार्च से जून पर्यन्त गुरु एवं शनि का गोचर अष्टम स्थान में होगा। इस समय के अंतराल कोई नया व्यापार प्रारम्भ न करें। जो काम कर रहे हैं उसमें भी सावधानी की आवश्यकता है।

वित्तीय

आर्थिक दृष्टिकोण से यह वर्ष अनुकूल नहीं रहेगा। द्वितीय स्थान पर शनि की दृष्टि आर्थिक स्थिति के लिए शुभ नहीं है। 23 मार्च के बाद राहु ग्रह का गोचर द्वितीय स्थान में होगा। उस समय अचानक आपका खर्च बढ़ सकता है। किसी को उधार पैसा न दें तथा अनावश्यक खर्च से बचें। परिवार में किसी मांगलिक कार्य में धन का व्यय हो सकता है। निवेश के मामले में जल्दबाजी न करें। 30 मार्च से जून पर्यन्त गुरु एवं शनि का गोचर अष्टम स्थान में होगा। उस समय आपको पैतृक संपत्ति अथवा अनायास स्वल्प धन लाभ हो सकता है। आर्थिक निर्णय लेने से पहले उस पर विचार करना बहुत जरूरी है।

पारिवारिक

पारिवारिक दृष्टिकोण से वर्ष का प्रारम्भ सामान्य फलदायक रहेगा। परिवार में शान्ति का वातावरण बना रहेगा। मार्च के बाद द्वितीय स्थान में गुरु एवं शनि के संयुक्त दृष्टि प्रभाव से समॄद्धि के साथ-साथ कुछ परेशानियों का आगमन हो सकता है। 29 जून के बाद भी पारिवारिक अनुकूलता भंग रह सकती है तथा कुछ विषम परिस्थितियां भी निर्मित हो सकती हैं। अत: अच्छा तो यही रहेगा कि विपरीत परिस्थितियों को झेलते समय आप अपने अन्दर प्रतिरोघात्मक शक्ति विकसित करें।

संतान और शिक्षा

संतान के लिए वर्ष का प्रारम्भ अनुकूल रहेगा। शिक्षण के प्रति उनकी रूचि बढेगी। उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सफलता मिलेगी। सर्व प्रकारेण संतान की उन्नति होगी। यदि आपका दूसरा बच्चा विवाह के योग्य हैं तो उसका विवाह संस्कार हो जाएगा। मार्च से जून पर्यन्त गुरु ग्रह का गोचर अष्टम स्थान में होगा। यह समय सन्तान के स्वास्थ्य के लिए अनुकूल नहीं है। 19 सितम्बर के बाद समय फिर से अच्छा हो जाएगा।

स्वास्थ्य

स्वास्थ्य की दृष्टि से वर्ष का प्रारम्भ श्रेष्ठ रहेगा। मानसिक रूप से सन्तुष्ट एवं शारीरिक रूप से स्वस्थ रहेंगे। 30 मार्च से जून पर्यन्त गुरु ग्रह का गोचर अष्टम स्थान में होगा। इस समय के अंतराल आपका स्वास्थ्य प्रतिकूल हो सकता है। अचानक आप बीमार हो सकते है। जुलाई से समय आपके स्वास्थ्य के लिए घीरे-घीरे अनुकूल होना शुरु हो जाएगा। 19 सितम्बर के बाद पूर्ण रूप से अनुकूल हो जाएगा। कभी-कभी मौसम जनित बीमारियां होंगी भी तो जल्दी ही आप अच्छे हो जायेंगे।

प्रतियोगिता परीक्षा

प्रतियोगिता परीक्षा के लिए यह वर्ष सामान्य फलदायक रहेगा। करियर में सफलता प्राप्ति के लिए लगातार परिश्रम करने की आवश्यकता है। व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने वालों के लिए समय अच्छा है। विद्यार्थियों के लिए वर्ष का प्रारम्भ बहुत बढिया रहेगा। परन्तु 30 मार्च के बाद मानसिक भटकाव के कारण पढ़ाई में अरूचि उत्पन्न हो सकती है। वर्ष के अन्तिम भाग में इस परिस्थिति से छुटकारा मिल जायेगा।

यात्रा

वर्ष के प्रारम्भ में व्यापारिक व्यक्तियों की व्यवसाय से संबंधित यात्राएं होंगी। आपकी धार्मिक यात्राओं में बाधा आ सकती है। 30 मार्च से जून पर्यन्त अष्टम स्थान में शनि एवं गुरु ग्रह के युति प्रभाव से समुद्र यात्रा के योग बन रहे हैं।

पूजा

वर्षारम्भ में आप नित्य पूजा-पाठ करती रहेंगी। लेकिन 30 मार्च से जून पर्यन्त गुरु ग्रह का गोचर अष्टम स्थान में होगा। उस समय पूजा-पाठ कर पाने में बाधा आएंगी। वर्ष के उत्तरार्द्ध में आप धार्मिक कार्य संपन्न करेंगे। महामृत्युंजय यन्त्र अपने घर में स्थापित करें और नित्य उसका पूजन करें। देव, ब्राह्मण, बुजुर्ग, गुरु व मंदिर के पूजारी की सेवा, सुश्रूषा करें। पीली दाल, केला व बेसन की मिठाई मंदिर में दान करें एवं गुरुवार का व्रत करें।

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