कालसर्प दोष से पाना है छुटकारा, तो रोज करें इस मंत्र का जाप

विशेष पूजन, व्रत व उपाय से काल सर्प दोष से मिलेगी मुक्ति

31 अगस्त को भाद्रपद नाग पंचमी मनाई जाएगी। भाद्रपद नाग पंचमी श्याम वर्ण व काले नागों को समर्पित है। इसी कारण महादेव के गले में स्थान पाने वाले कर्कोटक नाग की पूजा की जाती है। मान्यतानुसार इस दिन गोरखनाथ के चेले गोगा को सर्प रूप में पूजा जाता है, अतः इसे गोगा पंचमी भी कहते हैं।

गरुड़ पुराण के अनुसार नाग पंचमी पर घर के दोनों ओर नाग की पांच मूर्तियां खींचकर कर्कोटक, अनन्त, एलापत्र, कालिया व धृतराष्ट्र महानागों का पूजन करते हैं। स्कन्द पुराण के नगरखंड के अनुसार भाद्रपद पंचमी को चमत्कारपुर स्थित नागों का पूजन करने से सर्व मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

नारद पुराण में सर्प पाश से बचने के लिए नाग व्रत करने का विधान है। जिसके अनुसार सर्पदंश से सुरक्षा के लिए सभी परिजनों को भाद्रपद कृष्ण पंचमी पर सर्प को दूध पिलाकर उनकी पूजा करनी चाहिए।

भाद्रपद नाग पंचमी के विशेष पूजन, व्रत व उपाय से काल सर्प दोष से मुक्ति मिलती है, संतान को लंबी उम्र प्राप्त होती है और निसंतान दंपति को संतान सुख मिलता है।

स्पेशल पूजन विधि: घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा में काला वस्त्र बिछा लें, कच्चे सूत को हल्दी चंदन से रंग कर सात गांठें लगाकर सूत के पांच सांप बनाकर “नाग मंडल” स्थापित कर विधिवत पूजा करें।

सुगंधित तेल का दीपक करें, चमेली की अगरबत्ती करें, रोली, अक्षत व गुलाबी फूल चढ़ाएं तथा दूध, दही, घी, चीनी व शहद से बने पंचामृत नागदेव को अर्पित करें।

पूजन के उपरांत आरती करें। भीगा हुआ बाजरा, घी व गुड़ समर्पित करें और दक्षिणा चढ़ाएं। कपूर से आरती उतारें। इसके बाद भोग किसी पेड़ के नीचे रख दें।

स्पेशल मंत्र: ॐ नवकुलाय विद्द्हे विषदन्ताय धीमही तन्नो सर्प प्रचोदयात॥

स्पेशल पूजन मुहूर्त मध्यान: दिन 13:30 से दिन 14:30 तक।

स्पेशल पूजन मुहूर्त प्रदोष: शाम 19:25 से रात 20:25 तक।

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