स्कूल-कॉलेज के पाठ्यक्रम में ‘गीता’ शामिल करने को लेकर 11 को होगी सुनवाई

बिलासपुर।

छत्तीसगढ़ में बिलासपुर हाईकोर्ट ने श्रीमद् भगवत गीता को स्कूल और कॉलेज के पाठ्यक्रम में शामिल करने की जनहित याचिका पर एक्सेप्शन ले लिया. कोर्ट के एक्सेप्शन लेने के कारण मामले को दूसरे कोर्ट के बेंच में ट्रांसफर कर दिया गया है. अब मामले पर दूसरे बेंच में आगामी 11 जुलाई को अगली सुनवाई होगी.

बते दें कि याचिकाकर्ताओं और तीनों पक्षकारों यूजीसी, मानव संसाधन और अखिल भारतीय विश्वविद्यालय संगठन द्वारा बहस होनी थी. याचिकाकर्ताओं ने इसे लेकर पिछली सुनवाई में आवेदन दिया था, जिसे हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई में स्वीकार कर लिया था. तीन अलग-अलग संस्थाओं ने श्रीमद् भगवत गीता को स्कूल और विद्यालयों के पाठ्यक्रमो में शामिल करने के लिए जनहित याचिका बिलासपुर हाईकोर्ट में लगाई गई थी.

इसमें अखिल भारतीय मलयालम संघ के सुमन के मेमन, वीर वीरांगना संस्था की चंद्रप्रभा समेत अन्य ने स्कूल और कॉलेज के पाठ्यक्रम में श्रीमद् भगवत गीता को शामिल करने हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई है. इसमें कहा गया है कि श्रीमद् भगवत गीता एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें मानव जीवन की सभी पहलुओं को विस्तार से बताया गया है.

इसमें जन्म से लेकर मरण तक के उपदेश दिए हैं. प्रारंभिक सुनवाई में कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को कहा था कि संबंधित विभागों को आवश्यक पक्षकार बनाए.

बहस के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता से पिछली सुनवाई में पूछा गया था कि अगर कुरान और बाइबल को भी पाठ्यक्रमों में शामिल करने की मांग उठेगी फिर क्या होगा ? इस पर याचिककर्ताओं ने कहा कि कुरान और बाइबिल अलग धार्मिक ग्रंथ है जबकि श्रीमद् भागवत गीता मन की शक्ति को जागृत करने वाला है. कोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने श्रीमद् भगवत गीता के कुछ अंश भी सुनाए गए थे.

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