डॉ. शुक्ला को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग का प्रभार देना राज्य सरकार के दोहरे राजनीतिक चरित्र का परिचायक : भाजपा

विपक्ष में रहते हुए चिठ्ठी लिखकर बघेल व सिंहदेव जिस अधिकारी की गिरफ़्तारी चाह रहे थे, आज सत्ता में होते हुए उसी को लगातार उपकृत और पुरस्कृत होता देखकर नेताद्वय की चुप्पी यक़ीनन हैरतभरी : मूणत

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता और पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी की महानिदेशक और लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग में अपर मुख्य सचिव के अतिरिक्त प्रभार का दायित्व देख रहीं रेणु जी.

पिल्लै के अवकाश काल में उनके स्थान पर प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला को लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग का प्रभार दिए जाने के राज्य सरकार के फैसले को प्रदेश सरकार के दोहरे राजनीतिक चरित्र का परिचायक बताया है।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता व पूर्व मंत्री मूणत ने कहा कि प्रदेश में विपक्ष रहते हुए जिन टीएस सिंहदेव को डॉ. शुक्ला से काफी शिकायतें थीं, आज प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर टीएस सिंहदेव और प्रदेश सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा उन्हें लगातार एक के बाद एक अहम ज़िम्मेदारियाँ सौंपकर उपकृत और पुरस्कृत किया जा रहा है।

मूणत ने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव द्वारा विपक्ष में रहते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 12 अप्रैल, 2017 को लिखे गए उनके पत्र का हवाला देते हुए कहा कि तब मंत्री सिंहदेव ने प्रधानमंत्री श्री मोदी से नान घोटाले के उजागर होने के बाद दो आईएएस अफ़सरों की गिरफ़्तारी और उनके ठिकानों में छापेमारी नहीं होने शिकायत की थी। तब सिंहदेव ने इन दोनों अधिकारियों की इस मामले में मुख्य भूमिका होने की बात कहते हुए प्रधानमंत्री श्री मोदी को दो पृष्ठों का एक पत्र लिख भेजा था और उस पत्र में भूपेश बघेल ने भी हस्ताक्षर किया था ।

मूणत ने हैरानी जताई कि विपक्ष में रहते हुए सिंहदेव और भूपेश बघेल ने जिस अधिकारी के ख़िलाफ़ कार्रवाई और गिरफ़्तारी तक की मांग कर रहे थे, आज मुख्यमंत्री व मंत्री बनने के बाद सिंहदेव के मंत्रालय में ही उन्हें अहम ज़िम्मेदारियों से नवाज़कर उपकृत करने का काम किया जा रहा है। मूणत ने इसे कांग्रेस के दोहरे राजनीतिक चरित्र की शर्मनाक मिसाल बताते हुए कहा कि विपक्ष में रहते हुए जिस अधिकारी के ख़िलाफ़ चिठ्ठी लिखकर सिंहदेव व बघेल गिरफ़्तारी की मांग कर रहे थे, आज सत्ता में होते हुए उसी अधिकारी को लगातार उपकृत और पुरस्कृत होता हुआ देखकर भी नेताद्वय की चुप्पी यक़ीनन हैरत की बात है।

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