ईश्वर तुझे जरा भी रहम न आया, बिलखती हुए बोली शहीद की पत्नी

बहुत गरीब परिवार में पले थे सुखजिन्द्र

नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों के घरों में आज मातम पसरा हुआ है। काही किसी ने बाप खोया तो कहीं किसी ने बेटा। कहीं किसी ने भाई खोया है तो काही किसी का पति. इसी कड़ी में जिला तरनतारन के गंडीविंड गांव का एक जवान भी हमले में शहीद हुआ।

इस आतंकी हमले का पता चलते ही गांव गंडीविंड में गत रात से जहां मातम का माहौल देखने को मिला वहीं मृतक जवान के पारिवारिक सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। शहीद जवान का शव शनिवार को घर पहुंचने की पुष्टि प्रशासन की तरफ से कर दी गई है।

गांव गंडीविंड में किया जाएगा अंतिम संस्कार

शनिवार को सुखजिन्द्र सिंह का अंतिम संस्कार गांव गंडीविंड में किया जाएगा। वहीं प्रशासन के लेट पहुंचने पर परिवार में भारी रोष पाया जा रहा है। वहीं गोद में 7 माह के बच्चे को लेकर विलाप करती पत्नी बोली ‘ईश्वर तुझे जरा भी रहम न आया।

गांव गंडीविंड (हरीके पत्तन) के किसान गुरमेज सिंह के घर 12 जनवरी 1984 को माता हरभजन कौर की कोख से जन्म लेने वाले शहीद का नाम सुखजिन्द्र सिंह (35) इसलिए रखा गया ताकि वह बड़ा होकर माता-पिता को सुख दे परंतु परमात्मा को कुछ और ही मंजूर था। सुखजिन्द्र सिंह का छोटा भाई गुरजंट सिंह जंटा खेतीबाड़ी करता है और एक बहन लखविन्द्र कौर है। घर की हालत गरीबी वाली है।

यह परिवार 2 एकड़ जमीन पर की जाने वाली खेतीबाड़ी और 7 गाय-भैंसों से अपने घर का गुजारा करता है। सुखजिन्द्र सिंह की 2003 में सी.आर.पी.एफ. की 76वीं बटालियन में हुई कांस्टेबल की नियुक्ति के बाद इसका विवाह गांव शकरी की सर्बजीत कौर के साथ हुआ जिससे करीब 7 साल बाद सुखजिन्द्र सिंह के घर एक बेटा होने से वह पिता बना। बाबा बुड्ढा साहिब जी का अनुयायी सुखजिन्द्र सिंह हमेशा यारों के साथ हंसता-खेलता नजर आता। उसका सपना कैनेडा जाने का था।

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