छत्तीसगढ़

अदालत मे खड़े हुए देवी देवता, दोषी देवी देवताओं को मिला दंड

राज शार्दूल

कोण्डागांव:- केशकाल में आयोजित होने वाले भंगाराम जात्रा में क्षेत्र के सारे देवी देवताओं ने शिरकत की। सालों से चली आ रही परंपरा के अनुसार देवी देवताओं ने इस दौरान अपने कार्यों का ब्यौरा लेकर मुगंबाडी स्थित कुंवर पाठ के मंदिर से बाजा-गाजा के साथ अगवानी करते हुए केशकाल थाना पहुंचे। जहां से वे भंगाराम मंदिर के लिए रवाना हुए। मंदिर परिसर पहुंचने पर पूजा-अर्चना के बाद देवी देवताओं की अदालत लगाई गई । जिसमें देवी देवताओं पर लगे आरोपों की गंभीरता से सुनवाई शुरू हुई। मेले में इस दौरान पुजारी, गायता, सिरहा, ग्राम प्रमुख, मांझी मुखिया, पटेल उपस्थित रहे। पहले दिन फूल पान नारियल व धूप भेंट कर मांईजी की सेवा पूजा गई है। अलग अलग क्षेत्र से आए हुए देवी देवताओं को रात्रि में ठहराया गया था । इसके अलावा इस मौके पर देवी-देवताओं की प्रशन्नता के लिये बली और अन्य भेंट भी दी जाती है। बिना मान्यता के किसी भी नई देव की पूजा का प्रावधान नहीं है। जरूरत के मुताबिक अथवा ग्रामीणों की मांग पर उन्हें कठिन परीक्षा के पश्चात ही मान्यता दी जाती है। भंगाराम देवी मंदिर के पास ही एक ऐसा स्थान है जहां पर गांव-गांव से लाई गई सामग्रियों को खात्मे के रूप मे डाला जाता है। जिसे कारागार या जेल के रूप में माना जाता है। चली आ रही मान्यता के अनुसार वर्ष में एक बार लगने वाले इस मेले में महिलाओं का आना वर्जित है।

इंसान को गलती करने पर पुलिस एवं अदालत के समक्ष हाजिर होना पड़ता है जहाँ अदालत में मजिस्ट्रेट अपराध के अनुसार सजा तय करते हैं। कुछ इसी तर्ज पर जब देवी-देवता अपना दायित्व का निर्वहन सही ढ़ंग से नही करते हैं तो उन्हें भी आरोपों के कटघरें में खड़ा कर दंडित किया जाता है। ग्रामीणो ने बताया कि वे अपने अपने देवी देवता को लेकर यहां पहुचते हैं। जहाँ वे अपने देवी देवताओं की परीक्षा से संतुष्ट होकर जाते हैं।

पूजे जाते हैं डॉक्टर खान

जात्रा में आये लोगो ने बताया कि यहां खान देवता के नाम से पूजित देव जिसे ग्रामीण देशी अण्डे का भेंट चढ़ाया करते जिसके पीछे यह मान्यता है कि बहुत समय पूर्व क्षेत्र में हैजे का जबरदस्त प्रकोप फैला जिससे निजात दिलाने मांई जी की ही प्रेरणा से डॉक्टर खान जो कि नागपुर महाराष्ट्र के निवासी थे। यहां आये और मांईजी के आशीष से उन्होने हैजे का उपचार करना प्रारंभ किया व उत्कृष्ट कार्य किया। लोगों को बीमारी से निजात मिली। जिससे मांई जी ने उन्हें सम्मान पूर्वक अपने पास स्थान दिया तथा आज भी वे पठान देवता के नाम से यहां पूजे जाते है।

वर्ष मे एक बार आयोजित इस जात्रा का काफी धार्मिक महत्व माना जाता रहा है जिसमें आदिवासी वर्ग के अलावा अन्य समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में भाग लेते हैं। इस आयोजन में मजिस्ट्रेट की भूमिका में जो देवी होती है उसे भंगाराम माई के रूप में जाना जाता है भंगाराम माई के दरबार में जुटे शिकायतों का तत्काल फैसला होता है जिन देवी-देवताओं पर आरोप नहीं होते वे देवी देवता यहां से वापस घर चले जाते हैं जबकि अपराधी देवी देवताओं को यहां कैद कर लिया जाता है यहां जुटे देवी-देवताओं की शिकायत पर तत्काल फैसला होता है भादो माह की किसी भी शनिवार को होने वाली इस यात्रा को भादो जात्रा और भंगाराम जात्रा के नाम से जाना जाता है। इस यात्रा में कई गांव के ग्रामीण अपने अपने देवी-देवताओं के साथ बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं। रात्रि में यहां भोजन एवं विश्राम की व्यवस्था भी रहती है।

इस देवी देवता के अदालत के अवसर पर प्रमुख रूप से कमिश्नर बस्तर अमृत खलको, कलेक्टर नीलकंठ टेकाम, पुलिस अधीक्षक सुजीत कुमार, जिला पंचायत सीईओ सहित बडी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी शामिल हुए।

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