छत्तीसगढ़

जैविक खेती का रकबा बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रही है गोधन न्याय योजना

वर्मी कम्पोस्ट के विक्रय से महिलाओं की बढ़ी आय

ब्यूरो चीफ : विपुल मिश्रा :
संवाददाता : शिव कुमार चौरासिया

बलरामपुर 12 जनवरी 2021: राज्य शासन के मंशानुरूप कृषकों तथा पशुपालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से गोधन न्याय योजना की शुरुआत की गई है। गोधन न्याय योजना के अंतर्गत पशुपालकों से 2 रूपये प्रति किलो की दर से गोबर की खरीदी की जा रही है। जिले के छः विकासखण्डों के 100 गौठानों में पशुपालकों तथा कृषकों से गोबर खरीदा जा रहा है तथा गोबर से महिला समूह वर्मी कंपोस्ट भी तैयार कर रही है।

गोधन न्याय योजना

गोधन न्याय योजना से ग्रामीणों को आर्थिक लाभ तो हो ही रहा है साथ ही साथ जैविक खाद के उपयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति में भी वृद्धि हो रही है। जिले में गोधन न्याय योजना की मूल संकल्पना को विस्तार देते हुए छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा संचालित समुदाय आधारित स्थायी कृषि परियोजना से गांवों में भी जैविक कृषि को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिले में गोधन न्याय योजना के अंतर्गत 36 हजार 164.62 क्विंटल गोबर की खरीदी की गई है तथा 233.3 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट का विक्रय किया जा चुका है।Godhan Nyaya Yojana is proving to be helpful in increasing the acreage of organic farming

रसायनों के अत्यधिक प्रयोग से भूमि की उर्वरता नष्ट होने से फसल की उत्पादकता पर असर पड़ता है। फसलों में रसायनों के अधिक और अनियंत्रित प्रयोग के अनेकों नुकसान हैं कालान्तर में इसके परिणाम भयावह हो सकते हैं। राज्य शासन द्वारा कृषि कार्यों में परम्परागत पद्धतियों तथा गोबर खाद के प्रयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सुराजी गांव योजना तथा गोधन न्याय योजना की शुरूआत की गई। गांव में लम्बे से चली आ रही कृषि प्रणाली समावेशी विकास के सिद्धान्तों पर आधारित है जिसे पुर्नजीवित करने का सफल प्रयास किया जा रहा है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन

इसी क्रम में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की महिलाएं गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने के साथ ही समुदाय आधारित स्थायी कृषि परियोजना के अंतर्गत गांव-गांव में जैविक खेती का रकबा बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभा रही है। शासन के विभिन्न विभागों द्वारा वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग गौठानों में सामुदायिक बाड़ियों तथा उद्यानों में वृक्षारोपण हेतु किया जा रहा है। वहीं ग्रामीण महिला कृषक अपने खेतों तथा घरों की बाड़ियों में भी जैविक खाद का प्रयोग कर रही हैं।

वर्तमान में गौठान में 751.20 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट की पैकिंग की जा रही है तथा 35 हजार 360.12 क्विंटल गोबर वर्मी टांका में कम्पोस्ट के लिए प्रक्रियाधीन हैं। वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने में 100 स्व-सहायता समूह की 736 महिलाएं जुड़ी हुई है तथा खाद विक्रय से अच्छी आय प्राप्त कर रही है। गोधन न्याय योजना में समूह की महिलाएं तथा ग्रामीण कृषक महिलाओं की भागीदारी से जैविक खेती का रकबा बढ़ा है। महिलाओं द्वारा गांव-गांव में गोबर खरीदी तथा जैविक खाद को बढ़ावा देने के लिए जनजागरूकता रैली का भी आयोजन किया जा रहा है।

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