छत्तीसगढ़

भगवान के नाम स्मरण से कट जाते हैं सारे पाप : गोपालशरण

रायपुर : ग्राम भोथली में चल रही भागवत महापुराण कथा के चौथे दिन प्रवचन करते हुए संत गोपालशरण देवाचार्य ने भगवान के `नाम महिमा` का सुंदर वर्णन किया। उन्होंने व्यासपीठ से बताया कि श्रीमद्भागवत महापुराण के छठवें स्कंध में परीक्षित ने शुकदेव से पूछा कि कलयुग में यह मनुष्य जो तरह-तरह के पापमय कर्मों को कर रहा है, जिसके कारण इनको मरने के बाद अनेक योनियों में भटकना पड़ता है तो यह मनुष्य ऐसा कौन-सा उपाय करें, जिससे सभी प्रकार के पापों से मुक्त हो जाए। तो शुकदेव स्वामी ने बताया कि इस कलयुग में एक बहुत ही सरल सुंदर साधन है जिसको कर लेने से यह जीव समस्त पापों से मुक्त हो जाता है। वह उपाय यह है कि निरंतर भगवान का स्मरण करना, उनके नाम को लेना क्योंकि अजामिल जैसे पापी ने भी भगवान के नाम को लेकर, उनमें मन लगाकर अपना कल्याण कर लिया।

महंतक हरिदास त्यागी की स्मृति में बने गौशाला के शुभारंभ पर चल रहे श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास संत गोपालशरण देवाचार्य ने आगे बताया कि श्रीमद् भागवत में वर्णन आया है कि जब एक बार यमराज ने अपने दूतो से कहा कि मेरे दूतों! मृत्युलोक से उन्हीं नर-नारियों को इस यमपुरी में लाना जो भगवान के नाम को नहीं लेते। भगवान के चरण कमल में प्रणाम नहीं करते। और जो नर-नारी निरंतर भगवान के नाम को लेते रहते हैं। भगवान का स्मरण करते रहते हैं, वह नर-नारी कितना भी बड़ा पाप क्यों ना किए हों उन्हें यमपुरी में मत लाना क्योंकि भगवान के नाम में इतनी शक्ति है कि महान से महान पाप राशि क्षणभर में नष्ट हो जाती है। आगे श्रीमद् भागवत की कथा पर प्रवचन करते हुए संत गोपाल शरणदेव ने बताया कि भक्तों के हित के लिए भगवान विविध प्रकार से अवतार लेते हैं।

कथा में व्यासपीठ से संत श्रीगोपाल शरणदेवाचार्य ने बताया कि भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान नृसिंह के रूप में अवतरित हुए और हिरण्याकश्यप से प्रह्लाद के प्राणों की रक्षा की। आगे बताते हुए गोपाल शरण ने कहा कि देवताओं के कार्य को सिद्ध करने के लिए भी भगवान ने मोहिनी अवतार लेकर दैत्यों से अमृत की रक्षा की। गजेंद्र दृष्टांत का उल्लेख करते हुए बताया गया कि जब मगरमच्छ ने अपने मुंह में गजेंद्र के पैर को पकड़ लिया तो गजेंद्र ने अपने प्राणों की रक्षा के लिए भगवान को याद किया। गजेंद्र का उद्धार करने के लिए भगवान ने हरि का अवतार लेकर तुरंत ही उसके प्राणों की रक्षा की। इसके बाद आज होने वाली कथा के बारे में जानकारी देते हुए आचार्य मनीष शरण ने बताया कि कथा के 5वें दिन भगवान के वामन अवतार, उसके बाद श्रीराम जन्म की कथा का वर्णन महाराज द्वारा किया जाएगा। इसके बाद धूमधाम से भगवान श्रीकृष्ण का प्रागट्य महोत्सव मनाया जाएगा। कथा के दौरान राजेश तिवारी, प्रशांत पांडे, भरत पांडे, बंटी सोनी, कामेश, अनिल अग्रवाल, कृष्णा अग्रवाल, पंडित बृजेश शरणदेव, सुशील चौबे, बिट्‌टू, निखिल, रुपेश, चंद्रकांत आदि उपस्थित रहे।

आत्मा को देखने मन रुपी दपर्ण साफ होना जरूरी:

प्रभु हमें देने में कभी कमी नहीं करते लेकिन लेने में हम ही कमी कर जाते हैं। जीवन में परमात्मा कितनी बार अलग-अलग रूप में हमारे पास आते हैं लेकिन हम उनको पहचान नहीं पाते। भगवान सर्वत्र व्याप्त है लेकिन हम उन्हें देख सुन नहीं सकते। यदि हम साधना करें और भगवान कृपा हो तो कुछ क्षणों के लिए दिव्यता प्राप्त होती है और हम भगवान के दर्शन कर सकते हैं। आज लोग मंदिर जाते हैं और प्रार्थना करते कहते हैं कि भगवान हमारा एक काम कर देना हम सवा किलों लड्डू चढ़ाएंगे। सच्चे मन से पुकारने की देरी है भगवान तत्काल प्रकट हो जाएंगे। इसी तरह भोग विलास में रत विषयानुरागियों को भगवान की कोई भी कथा तृप्त नहीं कर सकती है। भगवान को नारियल, फूल, फल, मेवा, पैसे नहीं चाहिए वे तो प्रेम के भूखे हैं। हम तो ये सब चीजें अर्पित कर देते है लेकिन प्रेम अर्पित नहीं कर पाते। जीवन में विवेक को सदा साथ रखना चाहिए। हम परिस्थितियों के अनुसार विवेक का प्रयोग ना कर दूसरे के कष्ट को बढ़ावा देते हैं और स्वयं भी निंदा पात्र बनते हैं। मनुष्य को अपना चेहरा देखने के लिए जिस तरह दर्पण की जरूरत होती है उसी तरह आत्मा को देखने मन रूपी दर्पण की जरूरत होती है। भक्ति में ही वह शक्ति है जो प्रभु को अवतार लेने मजबूर कर देती है। कथा सुनना भी एक प्रकार का तप है जो कथा सुनते हैं उसके कष्ट अवश्य दूर होते हैं।</>

Tags

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.