गोल्डन फाइबर: कयर उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार की पहल

7 लाख से अधिक श्रमिक कयर रोजगार से जुड़े

हमारे देश में कई ऐसे पारंपरिक कुटीर, उद्योग रहे हैं, जो न सिर्फ हमारी जरूरतों को पूरी करते रहे हैं बल्कि रोजगार भी देते हैं। लेकिन आधुनिकता और चकाचौंध में कई पारंपरिक उद्योग विलुप्त होते गए या नाम मात्रा के रह गए। कयर उद्योग भी उनमें से ही एक है। मगर अब केंद्र सरकार वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत के तहत एमएसएमई के तहत आने वाले लघु और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा दे रही है। ऐसे में कयर उद्योग के प्रति अब महाराष्ट्र, गोवा और गुजरात में जागरूकता बढ़ाने के लिए कई कदम उठा रही है। यही नहीं सरकार इन उत्पादों को दूसरे देशों में निर्यात के लिए भी योजना बना रही है।
हाल ही में कयर बोर्ड ने महाराष्ट्र, गोवा और गुजरात राज्य में कयर उद्योग के विकास के लिए कई प्रस्ताव दिए हैं, जिनमें विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना और निर्यात को प्रोत्साहित करना शामिल है। लेकिन उससे पहले जान लेते हैं क्या है कयर उद्योग और कैसे है रोजगार में सहायक।

गोल्डन फाइबर का लौट रहे लोग

दरअसल, समुद्र किनारे वाले राज्यों में घर-घर चटाइयों से लेकर कयर प्लांट पोट तक सभी में प्राकृतिक फाइबर कयर का उपयोग चलन में था। वक्त बीतने के साथ, वैश्विक बाजार में प्राकृतिक फाइबर एवं इसके उत्पादों का इस्तेमाल चलन से बाहर होता चला गया। यदि हम वर्ष 2012-13 से पूर्व के इस उद्योग को देखें, तो ज्ञात होता है कि केरल के इस गोल्डन फाइबर ने अपना आधिपत्य खो दिया और विश्व स्तर पर इसका नगण्य या नहीं के बराबर प्रतिनिधित्व रह गया। हालांकि पिछले कुछ साल में इस ओर काफी ध्यान दिया गया और तमाम योजनाओं और वित्तीय मदद से न सिर्फ लोग रोजगार से जुड़ रहे बल्कि अपने उत्पाद को निर्यात भी कर रहे हैं।

क्या है कयर

कयर को नारियल की हस्क से निकाला जाता है। नारियल की अंदर के हिस्से यानि उसे मशीन में डाल कर लंबे रेशे या भूसी से प्राप्त फाइबर को कयर कहते हैं। नारियल फाइबर से बने रस्सियों और डोरियां, प्राचीन काल से उपयोग किया गया है। भारतीय नाविक सदियों समुद्र मार्ग से जाने के लिए जहाज में तारों के रूप कॉयर का उपयोग किया करते थे। रस्सी के अलावा कयर से चटाई समेत गद्दे और कई घरेलू उत्पाद बनाए जा रहे हैं। पाश्चात्य संस्कृति के रुझान में वृद्धि होने की वजह से कयर से संबंधित घरेलू उद्योगों के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है। परंतु समय बदलने के साथ, जब भारत में कयर उद्योग समेत कयर एवं कयर उत्पादों के निर्यात के बजारों का विकास करने के लिए संसद के अधिनियम यानि कयर उद्योग अधिनियम, 1953 के अंतर्गत भारत सरकार ने वर्ष 1954 में कयर बोर्ड का गठन किया और पुरातन चलन फिर से लौट आया।

क्या करता है कयर बोर्ड

कयर बोर्ड वैज्ञानिक तकनीकी और आर्थिक अनुसंधान, आधुनिकीकरण, गुणवत्ता सुधार, मानव संसाधन विकास, बाजार संवर्धन और उस उद्योग में लगे सभी लोगों का कल्याण करना, सहायता करना और प्रोत्साहित करना शामिल है। बोर्ड का मुख्यालय कोच्चि, केरल में है और देशभर में 29 मार्केटिंग आउटलेट सहित 48 प्रतिष्ठान चला रहा है। कयर उद्योग केरल राज्य में केंद्रित था, जो अब बोर्ड द्वारा किए गए प्रयासों से देश के अन्य हिस्सों में भी विस्तार कर रहा है।

महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा में कयर को विकसित करने का लक्ष्य

एमएसएमई मंत्रालय के तहत कयर बोर्ड, कयर के उपयोग को बढ़ावा देने, उद्यमियों के बीच जागरूकता पैदा करने और युवाओं को इस क्षेत्र में रोजगार के लिए प्रशिक्षित करने के लिए कई कदम उठाने के आगे आ रहा है, क्योंकि इसका उद्देश्य कोंकण क्षेत्र में कयर उद्योग का विकास करना है। कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने और क्षेत्र में कयर उद्योग विकसित करने के लिए 2021-22 के लिए एक कार्य योजना लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सिंधुदुर्ग में कयर बोर्ड के वर्तमान उप-क्षेत्रीय कार्यालय को स्थानांतरित कर दिया गया है और पर्याप्त स्टाफ शक्ति और कार्यालय स्थान के साथ कुडाल में क्षेत्रीय कार्यालय में अपग्रेड किया गया है। यह कार्यालय महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा में कयर उद्योग के विकास के लिए गतिविधियों को बढ़ावा देगा। कोंकण क्षेत्र महाराष्ट्र में एक संकीर्ण तटीय भूमि पट्टी है, जिसके पश्चिम में 720 किमी लंबा अरब सागर तट है और इसके पूर्व में सह्याद्री पर्वत श्रृंखलाएं समानांतर हैं।

केरल से है कयर का नाता

वैसे कयर का नाता केरल राज्य से है जहां पर बड़े पैमाने पर नारियल के पेड़ लगाए जाते हैं तथा यहां दक्षिण के समुद्री तट पर संस्कृति से लेकर खान-पान तक सभी जगह नारियल का बहुत अधिक महत्व है। यह राज्य अकेले ही कुल नारियल के उत्पादन का 61% एवं कुल कयर उत्पाद का 85% हिस्सा प्रदान करता है। सदियों पूर्व कयर ने केरल राज्य में अपनी छोटी सी शुरुआत से बड़ा ही लंबा रास्ता तय कर लिया है। वर्तमान में, यह एक व्यावसायिक एवं आधुनिक उद्योग है, जो कि भारत के तटीय क्षेत्र में फैला है।

कयर उद्योग से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

–कयर उद्योग देश के विभिन्न राज्यों में 7 लाख से अधिक कयर श्रमिकों को आजीविका प्रदान कर रहा है।

–उद्योग में लगभग 80 प्रतिशत कार्यबल महिलाएं हैं और यह देश के कई तटीय जिलों के ग्रामीण महिला सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

–देश में 1,570 पंजीकृत कयर निर्यातक हैं।

–वर्ष 2020-21 के दौरान भारत से कयर और कयर उत्पादों के निर्यात ने पिछले वर्ष की तुलना में 1,021 करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि के साथ 3778.98 करोड़ रुपये का अब-तक का सर्वकालिक रिकॉर्ड दर्ज किया है। वर्ष 2019-20 के आंकड़ों की तुलना में मूल्य में वृद्धि 37% हो गई है। कयर बोर्ड का कुछ ही वर्षों में 7,000 करोड़ रुपये के कयर निर्यात का लक्ष्य को हासिल करने पर जोर है।

–पीएमईजीपी (प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम) के तहत देश के विभिन्न राज्यों में कयर इकाइयां शुरू की गई है।

–कयर उत्पाद प्रकृति में पर्यावरण के अनुकूल हैं और पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार से “इको मार्क” प्रमाणीकरण प्राप्त किया है।

–कयर उत्पाद पर्यावरण को बचाता है और ग्लोबल वार्मिंग के संकट को दूर करने में मदद करता है।

–‘कयर पिथ’ पानी को बचाने के लिए उपयोग किया जाता है।

–‘कयर जियोटेक्सटाइल्स’ का उपयोग मिट्टी को बचाने के लिए किया जाता है।

–‘कयर वुड’ पेड़ों और जंगल को बचाने के लिए प्रयोग किया जाता है।

कयर उद्योग के लिए कयर बोर्ड की योजनाएं

–कयर विकास योजना
–पारंपरिक उद्योग के उत्थान के लिए फंड की स्कीम (स्फूर्ति)
–जूट उद्यमी योजना
–निर्यात बाजार संवर्धन योजना
–घरेलू बाजार संवर्धन योजना
–कॉयर इकाइयों के लिए उत्पादन अवसंरचना योजना का विकास
– -कौशल उन्नयन और गुणवत्ता में सुधार योजना
–विज्ञान और प्रौद्योगिकी योजना
–कयर श्रमिकों के लिए व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना
–व्यापार और उद्योग संबंधित कार्यात्मक सहायता सेवा योजना

रोजगार के अवसर पैदा करने में एमएसएमई महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में बहुत बड़ा योगदान देते हैं। कयर उद्योग अपने उत्पादों के अनुप्रयोग में नया रास्ता खोल रहा है। रोजगार के अवसर और उत्पाद एवं इसके अनुप्रयोग भी उपलब्ध कराते हुए, उपलब्ध योजनाओं और सेवाओं को लोकप्रिय बनाने के साथ पूरे भारत में विकसित हो रहा है।

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