फिल्म समीक्षा

REVIEW: लॉजिक नहीं, मनोरंजन से भरपूर है ‘गोलमाल अगेन’

रोहित शेट्टी की ‘गोलमाल’ सीरीज लोगों को हंसाने में हमेशा कामयाब रहती है. उन्होंने साल 2006 में ‘गोलमाल: फन अनलिमिटेड’ बनाई थी, उसके बाद 2008 में ‘गोलमान रिटर्न्स’ आई थी. दो साल बाद रोहित शेट्टी एक बार फिर ‘गोलमाल’ सीरीज की अगली फिल्म ‘गोलमान 3’ लेकर आए. दो-दो साल में ‘गोलमाल’ सीरीज की फिल्में रिलीज करने वाले रोहित ने ‘गोलमाल अगेन’ रिलीज करने में 7 साल का समय लगा दिया. फिल्म 20 अक्टूबर को रिलीज हुई है. जानते हैं, कैसी बनी है यह फिल्म…

कहानी:
फिल्म में दिखाया गया है कि जमनादास अनाथ आश्रम के 6 बच्चे किस तरह से एक दूसरे से बिछड़ते हैं और दोबारा कैसे उनकी मुलाकात होती है. इनमें गोपाल (अजय देवगन), लकी (तुषार कपूर), माधव (अरशद वारसी), लक्ष्मण1 (श्रेयस तलपड़े), लक्ष्मण 2 (कुणाल केमू) और पप्पी (जॉनी लीवर) शामिल हैं. अनाथालय की लाइब्रेरियन ऐना (तब्बू) हैं जो पूरी फिल्म के दौरान आत्माओं से कनेक्ट करने का काम भी करती हैं. गोपाल, खुशी (परिणीति चोपड़ा) से प्यार करता है.

कुछ ऐसी परिस्थितियां आती हैं, जहां निखिल (नील नितिन मुकेश) और वासु रेड्डी (प्रकाश राज) मिलकर इस अनाथालय को हटाकर अपना बिजनेस बढ़ाना चाहते हैं, जिसकी वजह से ये पांचो एक्टर्स, इन दोनों से बदला लेना चाहते हैं. कहानी में ट्विस्ट- टर्न्स आते हैं, भूला (जॉनी लीवर) के साथ साथ वसूली भाई (मुकेश तिवारी), बबली भाई (संजय मिश्रा) की एंट्री होती है और भूत का एंगल भी आता है. अंततः क्या होता है, आपको फिल्म देखकर ही पता चलेगा.

क्यों देखें फिल्म:
फिल्म में बड़े-बड़े सेट्स और कलरफुल लोकेशंस आपको आकर्षित करती है. रोहित शेट्टी की शूटिंग का स्टाइल भी आपको देखने में हमेशा की तरह दिलचस्प लगता है.

फिल्म की टैगलाइन ने पहले ही साफ कर दिया है कि इस दिवाली लॉजिक नहीं मैजिक देखना, तो उसी लिहाज से इस पूरी फिल्म के दौरान अगर आप दिमाग नहीं लगाएंगे तो ज्यादा मजा आएगा.

फिल्म की सिनेमेटोग्राफी, लोकेशंस, कैमरा वर्क कमाल का है.

अजय देवगन, अरशद वारसी, तुषार कपूर, कुणाल केमू, श्रेयस तलपड़े, जॉनी लीवर, संजय मिश्रा, मुकेश तिवारी, वृजेश हिरजी की अपनी-अपनी खूबी है, जिसे आप पिछली तीन सीरीज से देखते आए हैं और इन एक्टर्स ने जमकर हंसाने की कोशिश की है.

तब्बू, परिणीति चोपड़ा, प्रकाश राज और नील नितिन मुकेश की एंट्री भी इस गोलमाल को और आकर्षक बनाती है. जॉनी लीवर और संजय मिश्रा की मौजूदगी से ठहाके मारकर मारकर हंसने पर विवश करते हैं.

साजिद-फरहाद ने बेहतरीन संवाद लिखे हैं. गानो का कॉम्बिनेशन अच्छा है और खास तौर पर बैकग्राउंड स्कोर कमाल का है. फिल्म का आर्ट वर्क भी काफी दिलचस्प है.

Summary
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रोहित शेट्टी
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