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अच्छी खबर: एस्ट्राजेंका की वैक्सीन ट्रायल के दौरान 90 फीसदी सुरक्षा देने में कामयाब

एस्ट्राजेंका के अलावा मॉडर्ना और और फाइजर की वैक्सीन शामिल

नई दिल्ली: कोरोना संक्रमित लोगों के लिए अच्छी खबर सामने आई है. दरअसल कोरोना के लिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर वैक्सीन बना रही एस्ट्राजेंका का दावा है कि उन्होंने वैक्सीन ट्रायल के दौरान 90 फीसदी सुरक्षा देने में कामयाबी हासिल की है. इसके लिए प्रयोग के दौरान पहले वैक्सीन की आधी डोज दी गई, इसके लगभग एक महीने बाद वैक्सीन की फुल डोज दी गई.

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में ह्युमन जेनेटिक्स के प्रोफेसर वैक्सिनलॉजिस्ट एड्रियन हिल से बातचीत:
सवाल: क्या कोरोना के खिलाफ जंग में अब मुस्कुराने का वक्त आ गया है? एड्रियन हिल: हां हम मुस्कुरा सकते हैं, हमने ट्रायल के दौरान जिन लोगों को वैक्सीन दी उन्हें अबतक अस्पताल जाने की जरूरत नहीं पड़ी है. इसके लिए हमने वन डोज का तरीका अपनाया है. इसमें पहली वैक्सीन का आधा डोज दिया जाता है, इसके लगभग एक महीने बाद पूरा डोज दिया जाता है. बजाय इसके कि हम एक महीने के अंतराल पर दो पूरी डोज वैक्सीन के रूप में दें. Also Read – बुर्के वाले महिला ने सरेआम चलाई गोलियां, दी गंदी -गंदी गालियां, देखें VIDEO इसका फायदा ये होगा कि हम ज्यादा लोगों को टीका लगा सकते हैं, मुझे लगता है ये सचमुच में अच्छी खबर है कि दुनिया में इस वक्त तीन कारगर वैक्सीन अंतिम चरण में हैं. इनमें एस्ट्राजेंका के अलावा मॉडर्ना और और फाइजर की वैक्सीन शामिल है.

सवाल: क्या ये कहना है सही है ऑक्सफोर्ड वैक्सीन के भंडारण के लिए बेहद सख्त कोल्ड स्टोरिंग की जरूरत नहीं पड़ती है? जवाब: हां, आपको वैक्सीन को फ्रिज के तापमान पर रखने की जरूरत होती है, कई बार डीप फ्रिज करना पड़ता है. दुनिया भर में इसका वितरण मौजूदा वैक्सीन वितरण सिस्टम से किया जा सकता है.

सवाल: इस वैक्सीन की संभावित कीमत क्या हो सकती है? जवाब: उच्च आय वर्ग वाले देशों में महामारी के दौरान इसकी कीमत 3 डॉलर प्रति वैक्सीन रहने की उम्मीद है. महामारी के बाद निम्न आय वर्ग वाले देशों में कीमत उतना ही रहने की उम्मीद है, लेकिन हो सकता है कि अमीर देशों में वैक्सीन निर्माता कुछ फायदा कमा सकते हैं.

सवाल: आपातकाल इस्तेमाल के लिए वैक्सीन कब तैयार हो जाएगी (कोरोना वॉरियर्स के लिए) जवाब: हम लोग जल्द ही आपातकाल में इसके इस्तेमाल की इजाजत मांगेंगे. हम लोग भारत में अपने पार्टनर सीरम इंस्टीट्यूट और ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया के साथ काम कर रहे हैं, हम जल्दी आगे बढ़ना चाहेंगे. जनवरी के शुरुआती दिनों तक हमारा लक्ष्य है, लेकिन सामूहिक स्तर पर टीकाकरण में अभी कुछ वक्त लग सकता है. भारत एक बड़ा देश है, लेकिन सीरम भी दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी है.

सवाल: वैक्सीन बनाने में काफी समय लगता है, आपने इतनी जल्दी में कामयाबी कैसे पाई है? जवाब: हमारे छात्रों को इसमें 10 साल लगते थे, हम अभी 10वें महीने में हैं, ये पहले के तरीकों से कई मायनों में अलग रहा है. इस बार फंड लगाने वालों ने, नियामक संस्थाओं ने, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने मदद की है. कई बार हमें क्लिनिकल प्रोसेस को ओवरलैप करने की इजाजत मिली है. लगभग 270 लोगों ने दिन-रात काम किया है. इसके अलावा सिर्फ ब्रिटेन में 19 जगहों पर ट्रायल हो रहा था, ब्राजील में 10000 लोगों को वैक्सीन दी जा चुकी है. दक्षिण अफ्रीका में भी प्रक्रिया चल रही है. अमेरिका में 10 हजार लोगों को वैक्सीन दी गई है. केन्या ने शुरू कर दिया है. भारत में सीरम कर रहा है.

सवाल: क्या आपने इस कामयाबी का जश्न शुरू कर दिया है? जवाब: हम लोग अबतक फिनिशिंग लाइन तक नहीं पहुंचे हैं, लेकिन हमने अंतिम बाधा पार कर ली है. अगले कुछ सप्ताह कागजी कार्रवाई के होंगे, जो बेहद व्यस्त रहने वाले हैं, हमें उम्मीद है कि हम साल के अंत तक जश्न मनाएंगे.

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