पैथालॉजी लैब्स के पर कतरने की तैयारी में सरकार

स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों से मांगी राय

नई दिल्ली। सस्ते टेस्ट पैकेजों के नाम पर लोगों के दर्जनों गैर-जरूरी टेस्ट करने के पैथालॉजी लैब्स की बाजारू रणनीति पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय लगाम लगाने जा रहा है। मंत्रालय ने क्लीनिक स्टैबलिशमेंट रूल्स में एक प्रस्ताव जोड़ने जा रहा है, जिसके तहत पैथालॉजी में सिर्फ उन्हीं मरीजों की जांच की जा सकेगी, जिनके पास किसी डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन हो। मंत्रालय ने इस प्रस्ताव पर लोगों की राय मांगी है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय को इस बात की लगातार शिकायत मिल रही थी कि ज्यादातर पैथालॉजी में बड़े पैमाने पर गैर-जरूरी टेस्ट किए जा रहे हैं। इसमें बड़ा योगदान पैथालॉजी लैब्स की ओर से दिए जाने वाले टेस्ट पैकेज का होता है, जिसमें तीन हजार से लेकर 10 हजार रुपए तक के पैकेज में एक दर्जन से लेकर तीन दर्जन से अधिक टेस्ट किए जाते हैं। लोग इन पैथालॉजी के बहकावे में आकर इन टेस्ट को करवा लेते हैं, जिनकी कोई जरूरत होती नहीं है।

इसलिए मंत्रालय क्लीनिक स्टैबलिशमेंट (सेंट्रल गवर्नमेंट) रूल्स में बदलाव करके इसमें यह प्रावधान भी डालने जा रहा है कि सामान्यत: जांच सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर की जाएगी। अधिकारी ने कहा कि मंत्रालय लंबे समय से इस प्रावधान को लागू करने पर विचार कर रहा था। अधिकारी ने कहा कि अभी इस पर लोगों से विचार मांगे गए हैं। इसे बदलाव को लागू नई सरकार के गठन के बाद किया जाएगा।

राज्यों में होगी ये समस्या

पब्लिक हेल्थ विशेषज्ञ स्वास्थ्य मंत्रालय के इस प्रस्ताव को बेहद जरूरी मान रहे हैं, लेकिन इस प्रस्ताव के सफलता से लागू होने पर उन्हें संदेह है। पब्लिक हेल्थ थिंकटैंक पीएचएफआई के एक विशेषज्ञ ने कहा कि यह प्रस्ताव उन राज्यों में ही लागू होगा जहां क्लीनिक स्टैबलिशमेंट एक्ट लागू है। जबकि वर्तमान में 29 में से मात्र 11 राज्यों में यह एक्ट लागू है। ऐसे में उन 18 राज्यों में इस प्रस्ताव को कैसे लागू किया जाएगा, जहां यह कानून लागू ही नहीं किया गया है।

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