छत्तीसगढ़

शासकीय राजस्व भूमि पर बेजा कब्जा बदस्तूर जारी – रिजवी

प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा

रायपुर: जकांछ नेता, मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम के पूर्व अध्यक्ष, वरिष्ठ अधिवक्ता इकबाल अहमद रिजवी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा है कि ग्रामीण अंचल की बेशकीमती शासकीय राजस्व भूमि पर सक्षम रसूखदारो द्वारा खुले आम कब्जा विगत 15 वर्षो के भाजपा शासनकाल में किया गया है, तथा आम चर्चा है कि बेजा कब्जाधारियो को सरपंच एवं पटवारियो का संरक्षण प्राप्त था।

सरपंच एवं पटवारी किसी अज्ञात कारणवश मूकदर्शक बनकर शासकीय भूमि पर हो रहे बेजा कब्जो को अपनी मौन स्वीकृति देते रहे है।

रिजवी ने कहा है कि राजस्व भूमि पर हुये बेजा-कब्जे का श्रेय उस क्षेत्र के सरपंच एवं पटवारी को जाता है। शासन ऐसे जिम्मेदार सरपंच एवं पटवारी के विरूद्ध कडे़ नियम एवं निर्देश जारी करे तथा नियमो में दंडित करने का प्रावधान भी होना चाहिए तब जाकर राजस्व भूमि की अफरा-तफरी का विगत 15 वर्षो से चला आ रहा खुला खेल फरूखाबादी पर अंकुश लग सकेगा।

पटवारियो को शासन द्वारा अपने हल्को की हफ्तावार निरीक्षण रिपोर्ट संबंधित राजस्व अधिकारी को देने निर्देशित किया जाए। पटवारी एवं सरपंच का यह दायित्व है कि वह आबादी, चारागाह एवं गौठान की शासकीय भूमि पर हो रहे कब्जो की सूचना तत्काल कलेक्टर एवं संबंधित तहसीलदार को दे।

राजस्व भूमि पर हो रहे अतिक्रमण रोकना अत्यंत आवश्यक है अन्यथा वह दिन दूर नही जब ग्रामो में सार्वजनिक इस्तेमाल की राजस्व भूमि का नामोनिशान नही रह जाएगा। इस दिशा में अतिक्रमण रोकने एवं उस हेतु समुचित कार्यवाही के लिए हल्का पटवारियो का जो 5 से लेकर 10 वर्ष होने के बावजूद एक ही स्थान पर चिपके हुए है उनका स्थानांतरण करना अत्यंत आवश्यक है।

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शासकीय राजस्व भूमि पर बेजा कब्जा बदस्तूर जारी - रिजवी
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