छत्तीसगढ़

15 लाख बच्चों का शिक्षण शुल्क वहन करे सरकार : पॉल

9 जुलाई को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा गया

रायपुर। प्राईवेट स्कूलों के द्वारा लगातार पालकों से फीस की मांग किया जा रहा है, जबकि डीपीआई ने फीस स्थगित रखने का फरमान जारी किया जिसके खिलाफ प्राईवेट स्कूलों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर किया, जिस पर 9 जुलाई को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा गया है।

प्राईवेट स्कूलों की दलिल है कि उनके पास शिक्षकों को वेतन देने के लिए पैसे नहीं है, जबकि शिक्षकों के द्वारा बच्चों को ऑन-लाईन क्लासेस के माध्यम से पढ़ाया जा रहा है, वहीं ऐसी भी लगातार शिकायतें आ रही है कि जिन पालकों ने फीस नहीं दिया, उनके बच्चों को ऑनलाईन क्लासेस से वंचित कर दिया गया है। कुछ जिलों में तो अब प्राईवेट स्कूलों ने ऑनलाईन क्लासेस बंद करने की धमकी तक दे दी है, जिसके लिए जिला प्रशासन को 5 अगस्त की मोहलत दिया गया है। यदि इससे पहले उन्हें फीस वसूली की अनुमति नहीं दिया जाता है, तो ऑनलाईन क्लासेस बंद कर दिया जाएगा।

छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल का कहना है कि मा. उच्च न्यायालय बिलासपुर में भी प्राईवेट स्कूलों ने स्कूल शिक्षा विभाग और डीपीआई के खिलाफ याचिका दायर कर मा. उच्च न्यायालय से फीस लेने की अनुमति की मांग किया गया था, जिस पर 9 जुलाई को सभी पक्षों की बातों को सुना गया और फैसला सुरक्षित रखा लिया गया है और किसी भी दिन निर्णय आ सकता है।

श्री पॉल का कहना है कि उनके द्वारा राज्य सरकार और मा. उच्च न्यायालय से यह आग्रह किया है कि सभी प्राईवेट स्कूलों की विगत तीन वर्षो की ऑडिट रिर्पोट/बैलेंस सीट की तीन सदस्यीय टीम बनाकर जांच किया जाए और ऐसोसियेशन ने सरकार से यह मांग किया है कि इस कोरोना काल में सभी 15 लाख बच्चे जो प्राईवेट स्कूल में पढ़ रहे है, उनके इस शिक्षा सत्र 2020-21 की शिक्षण शुल्क सरकार को वहन करना चाहिए, क्योंकि इस कोरोना काल में हर वर्ग के लोग आर्थिक मंदी से गुजर रहे है।

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