राष्ट्रीय

डूबती कंपनी IL&FS पर सरकार ने किया कब्जा

नौ साल बाद एक बार फिर सरकार ने किसी प्राइवेट कंपनी पर कब्जा किया है. इससे पहले साल 2009 में सरकार ने सत्यम कंप्यूटर को अपने कब्जे में ले लिया था. तब कंपनी के अंदर अकाउंटिंग स्कैम (लेखा-जोखा में गड़बड़ी) सामने आने पर निवेशक आईटी सेक्टर में निवेश करने से घबराने लगे थे.

वहीं अब ब्याज नहीं चुका पाने की वजह से सुर्खियों में आई आईएलएंडएफएस कंपनी पर सरकार का कब्जा हो गया है. केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि वह कर्ज में फंसी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी आईएलएंडएफएस के लिए आवश्यक पैसे का प्रबंध सुनिश्चित करने को प्रतिबद्ध है ताकि कंपनी को अब आगे किसी अन्य कर्ज का भुगतान करने में चूक नहीं करनी पड़े.

वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘यह बहुत जरूरती हो गया है कि अब किसी अन्य कर्ज के भुगतान में चूक को तत्काल रोका जाए तथा पहले हो चुकी चूक के समाधान के लिए कदम उठाए जाएं.’

मंत्रालय ने कहा, ‘इसके लिए संपत्तियों की बिक्री, कुछ देनदारियों के पुनर्संरचना तथा निवेशकों एवं कर्जदाताओं की ओर से नया धन उपलब्ध कराए जाने जैसे कई कदम उठाने की जरूरत होगी. आईएलएंडएफएस के निदेशक मंडल में बाजार का भरोसा तथा कंपनी को फिर से खड़ा किये जाने की जरूरत है.’

वित्त मंत्रालय का यह बयान ऐसे समय आया है जबकि राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की महाराष्ट्र पीठ ने सरकार को सोमवार को ही इस कंपनी के निदेशक मंडल पर नियंत्रण करने की अनुमति दे दी है.

वित्त मंत्रालय ने कंपनी में पैसे की कमी के बाद भी उसके द्वारा लाभांश का भुगतान जारी रखने और प्रबंधकीय पदों पर भारी-भरकम वेतन देने का जिक्र करते हुए कहा, इससे दिखता है कि प्रबंधन ने पूरा भरोसा खो दिया है. उसने कहा कि समूह की कुछ कंपनियों के खिलाफ गंभीर शिकायतें भी हैं जिनके लिए गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) द्वारा जांच के आदेश दिये जा चुके हैं.