संपत्ति की फर्जी खरीद-फरोख्त रोकने कानून बनाएगी सरकार

नई दिल्ली।

जमीन और मकान सहित अन्य अचल संपत्ति की खरीद फरोख्त तथा पंजीकरण में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए केंद्र सरकार संपत्ति की मिल्कियत के पुख्ता निर्धारण से संबंधित कानून बनाएगी। केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मामलों के मंत्रालय ने इसके लिए भूमि स्वामित्व (लैंड टाइटिल) अधिनियम बनाने की प्रक्रिया शुरू की है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि संपत्ति संबंधी फर्जीवाड़े को रोकने के लिए जमीन की मिल्कियत के राष्ट्रीय स्तर पर जुटाए गए आंकड़ों को समेकित कर इस समस्या से निपटा जा सकता है।

उन्होंने कहा, भूमि स्वामित्व अधिनियम का प्रारूप मंत्रालय द्वारा तय कर इसे संसद से पारित कराने की प्रक्रिया को जल्द पूरा किया जा रहा है। केंद्रीय कानून बनने के बाद अन्य राज्य इसे अपनी जरूरत के मुताबिक लागू कर सकेंगे। सूत्रों के मुताबिक इस कानून में संपत्ति पंजीकरण प्राधिकरण गठित करने का भी प्रावधान होगा।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में आवास एवं शहरी विकास मामलों के राज्यमंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि दिल्ली सहित देश के अन्य इलाकों में इस समस्या से निपटने के लिए यह कानून बनाया जाएगा।

संपत्ति का होगा विशिष्ट नंबर

कानून का मकसद देश में प्रत्येक भूखंड का एक विशिष्ट पंजीकरण नंबर निर्धारित कर इन आंकड़ों का डिजिटलीकरण करना है। सरकार द्वारा हालांकि 2008 में शुरू किए गए राष्ट्रीय भू अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत देश भर में संपत्ति के पंजीकरण संबंधी आंकड़ों का डिजिटल रूप में एकत्रीकरण किया जा रहा है।

दिल्ली के ग्रामीण इलाकों में खेती की जमीन पर आवास एवं विकास कार्यों की जरूरतों की पूर्ति के लिए प्रस्तावित लैंड पूलिंग पॉलिसी भी इस कानून के दायरे में होगी। अधिकारी ने बताया कि प्रस्तावित लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत जमीन के पंजीकरण की प्रक्रिया में एक ही भूखंड का अलग अलग व्यक्तियों द्वारा पंजीकरण कराने के आधार पर सामने आई। इस समस्या के समाधान के लिए मंत्रालय ने भूमि स्वामित्व कानून की जरूरत महसूस करते हुए यह पहल तेज की है।

पूरे देश में होगा सामान कानून

केंद्र सरकार के स्तर पर नए सिरे से की गई पहल के तहत संपत्ति के पंजीकरण और सर्वे की पूरे देश में एक समान प्रक्रिया अपनायी जाएगी। इसके तहत संपत्ति के स्वामित्व के पंजीकरण का प्रावधान होगा। फिलहाल यह विषय राज्यों के अधीन है और प्रत्येक राज्य में अलग-अलग कानून है।

मौजूदा व्यवस्था

मौजूद व्यवस्था में भूमि एंव संपत्ति के पंजीकरण की व्यवस्था राज्य सरकारों के अधीन है। इस व्यवस्था के तहत संपत्ति की खरीद महज विक्रय विलेख के आधार पर हो जाती है। बिक्री के बाद संपत्ति मालिक नाम अंतरण का दावा कर संपत्ति का पंजीकरण अपने नाम करा सकता है। पंजीकरण के फलस्वरूप महज संपत्ति के कब्जे का अधिकार मिलता है, स्वामित्व का नहीं।

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