छत्तीसगढ़

हाईकोर्ट में OBC आरक्षण के लिए पक्ष रखेगी सरकार, लड़ाई लड़ेंगे: सीएम बघेल

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने धमतरी में मीडिया से कहा

रायपुर: हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार को तगड़ा झटका देते हुए पिछड़ा वर्ग आरक्षण का दायरा 27 प्रतिशत किए जाने के मामले में दायर याचिका पर अपना स्टे दे दिया है।

तय मानक 14 प्रतिशत को बढ़ा कर 27 फ़ीसदी किया गया था

राज्य सरकार ने बीते चार सितंबर को छत्तीसगढ लोकसेवा (अनुसुचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण) संशोधन अध्यादेश जारी कर ओबीसी के लिए पहले तय मानक 14 प्रतिशत को बढ़ा कर 27 फ़ीसदी किया गया था, इसी अध्यादेश में दस प्रतिशत आरक्षण आर्थिक आधार पर भी दिए जाने का उल्लेख था।

हाईकोर्ट में इस अध्यादेश के विरोध में कुल 11 याचिकाएँ दायर की गई थीं। हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस पी आर रामचंद्र मेनन और जस्टिस पी पी साहू की संयुक्त बेंच ने इन्हें एक साथ लिस्ट कर दिया और इसकी सुनवाई की।

इधर इस अंतरिम आदेश के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने धमतरी में मीडिया से कहा

“माननीय न्यायालय ने 69 प्रतिशत आरक्षण स्वीकार लिया है..याने एससी और आर्थिक रुप से पिछड़े वर्ग के आरक्षण को स्वीकार लिया है.. ओबीसी के आरक्षण को स्वीकार नही किया गया है.. जिसको लेकर हम अपनी लडाई लड़ेंगे .. न्यायालय में अपना पक्ष रखेंगे”

अधिवक्ता निशिकांत सिन्हा ने कहा

“हमने यह कहा था कि राज्य ने जाति के वास्तविक आँकड़ो के बगैर आरक्षण लागू किया, साथ ही यह प्रश्न भी था कि, जब राज्य के पास पिछडा वर्ग समिति है, जो डाटा कलेक्ट करती है, और पिछड़े वर्ग की देख रेख सुनिश्चित करती है तो उसकी अनुशंसा कहीं दर्ज ही नही थी, उसकी अनुशंसा के बगैर अध्यादेश लाया गया” अधिवक्ता निशिकांत सिन्हा

राज्य की ओर से अध्यादेश के समर्थन में 1980 के महाजन कमेटी को आधार बताया गया।साथ ही नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइज़ेशन और आरबीआई के आँकड़े दिए गए थे, जो पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या 45.5 प्रतिशत बताते हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता कुणाल शुक्ला ने कहा

“ यह अध्यादेश संविधान और सर्वोच्च न्यायालय के खिलाफ था, पचास प्रतिशत से उपर आरक्षण लागू नही किया जा सकता था, और आँकड़ो को लेकर प्रश्न तो है ही.. जिन कतिपय राज्यों में यदि यह पचास प्रतिशत से उपर का आँकड़ा प्रभावी है तो उसके पीछे राज्य में विशेष अनुसूची का प्रभावी होना है, और छत्तीसगढ़ में ऐसी कोई विशेष अनुसूची प्रभावी नही है”।

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