ग्राम पंचायत रसेला हुआ फर्जी ओडीएफ, स्वच्छता अभियान पर लाखों की राशि की हजम

स्वयं निर्माण करने बाले हितग्राहियों को बाटे चार हजार तो किसी को दस हजार।

छुरा। स्वच्छता के लिए चलाए गए अभियान को भ्रष्टाचार की बुरी नजर लग गई है। इसका परिणाम यह हुआ है कि स्वच्छता के लिए स्वीकृत की गई राशि भ्रष्ट कर्मचारी सरपंच ,सचिव हजम कर रहे हैं।

निर्मल भारत अभियान से लेकर स्वच्छता अभियान तक के नाम पर बड़ी रकम केन्द्र और राज्य शासन की ओर से स्वीकृत की गई थी।
गरियाबंद जिला के जनपद पंचायत छुरा अंतर्गत ग्राम पंचायत रसेला में मनरेगा के तहत 225 एवं एस बी एम से 223 शौचालय हितग्राहियों स्वीकृत हुई थी।

प्रोत्साहन राशि 12-12 हजार की लागत से इनका निर्माण कराए जाने थे शौचालय के निर्माण में सरपंच पति विगेन्द्र ठाकुर जो कि मटेरियल सप्लायर के साथ ठेकेदारी भी शौचालय निर्माण में किया और गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया है।

इससे ग्रामीणों में आक्रोश है। कई घरों के शौचालय इतने घटिया बनाए गए हैं कि उनकी नींव ही धंस रही है। वहीं सैप्टिक टैंक स्तरहींन बनाया गया है। जिनके दरवाजे टूटकर बिखर चुके है इससे लोग यहां शौच करना अपनी जान जोखिम में डालने के बराबर समझ रहे हैं।

0-शौचालय बनाने में घटिया साम्रागी का आरोप

शौचालय का उपयोग छेना,लकड़ी ,भूसा रखने में कर रहे है ,स्वच्छ भारत अभियान के तहत बने शौचालय में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है। ग्राम रसेला में बने शौचालयों के निर्माण के दौरान मानक को ताक पर रखा गया।

नींव सहित सोख्ता की निर्धारित साइज में भी गड़बड़ी की गई है। सोख्ता का छड़ के का उपयोग नही किया इसकी वजह से कई घरों में बना सोखता क्षतिग्रस्त हो गया है।
साथ ही सेप्टिक टैंक का लेंटर भी बिना छड़ के ढलाई किए जाने से यह भी क्षतिग्रस्त होने लगा है।

इसकी वजह से कई शौचालय अभी से ही धंसने लगे हैं। विकासखंड के हर ग्राम को खुले में शौच से मुक्त करने की योजना को ग्राम रसेला के सरपंच सचिव द्वारा मजाक बना दिया गया है।

इस संबंध में

सैय्यद इनायत अली वार्ड 03 पंच पंचायत रसेला ने बताया कि शौचालय निर्माण में जमकर हुई मनमानी की गई है और सरपंच पति शुरू में पंचायत के कार्यो में भी इंटर फेर का प्रयास किया लेकिन हम पांचों को नियम पता है,हमने पंचायत की मर्यादा का पालन करते हुई सरपंच पति पद को महत्व नही दिया और जो जनप्रतिनिधि नही है उनको कोई दखल नही देने दिया।

लेकिन पंचायत के शौचालय निर्माण की गुणवत्ता के सम्बंध में हमने सचिव और सरपंच को कई बार कहा लेकिन कमीशन खोरी का भूत नही उतरा जिन लोगो ने अपने शौचालय खुद बनाये है

उन्हें सामग्री के नाम पर किसी को चार बोरी सीमेंट तो किसी टॉयलेट सीट दिया गया और उन हितग्राहियों के चार हजार तो किसी को 6 हजार रुपया काटकर भुगतान किया गया जो दुर्भाग्य पूर्ण है ।गुणवत्ताहीन निर्माण की शिकायत अधिकारियों से भी की गई है लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

भुनेश सचिव ग्राम पंचायत रसेला

हमारी पंचायत ओडीएफ हो चुकी है जो शौचालय अधूरे है उनका कार्य पूर्ण करवागें, सरपंच पति का टेडर्स है जी एस टी भी है हम सामग्री उनसे भी लेते है और बाहर से भी लेते है।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी एन के मांझी से चर्चा करने पर उन्होंने कहा कि मैं संडे को आऊंगा क्या कम बेसी है उसको देखता हूँ आप संडे को वहीं पर मिलो ।संडे को मिलते है वहीँ पर ठीक है।

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