अंतर्राष्ट्रीय

भारतीय मूल के प्रोफेसर को ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ’ की ओर से 20 लाख रुपए का अनुदान

पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में 'ल्यूपस' के अधिक होने के संबंध में खोज करने के लिए यह अनुदान दिया गया.

ह्यूस्टनः ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ’ की तरफ से भारतीय मूल के प्रोफेसर को 20 लाख रुपए का अनुदान किया गया है. दरअसल भारतीय मूल के प्रोफेसर चंद्र मोहन और ह्यूस्टन विश्वविद्यालय कको उनके दो सहकर्मियों ह्यूग रोय और लिली क्रान्ज को पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में ‘ल्यूपस’ के अधिक होने के संबंध में खोज करने के लिए यह अनुदान दिया गया.

ल्यूपस एक ऐसी बीमारी है, जिसमें त्वचा पर सूजन आ जाती है और प्रतिरोधक क्षमता अपने ही स्वस्थ ऊतकों पर हमला कर देती है। मोहन ने कहा, ‘‘ ‘बैंक1′ महिलाओं और पुरुषों दोनों में मौजूद होता है लेकिन महिलाओं पर इसका असर अधिक खतरनाक होता है

क्योंकि बैंक1 जीन और मादा हार्मोन एक साथ काम करते हैं और बीमारी पैदा करने वाले ऑटो एंटीबॉडी को बनाते हैं।” आनुवांशिक अध्ययनों में ल्यूपस से जुड़े कई जीन की पहचान हुई, लेकिन यह काम कैसे करते हैं यह अब भी स्पष्ट नहीं हो पाया है। इनमें से एक जीन बैंक1 है। मोहन अब आणविक तंत्र का अध्ययन करेंगे।

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भारतीय मूल के प्रोफेसर को 'नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ' की ओर से 20 लाख रुपए का अनुदान
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