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नए जैव संकेतक की मदद से ब्रेन ट्यूमर के इलाज में मिलेगी बड़ी सफलता

नई दिल्ली : ग्लियोमा मस्तिष्क (ब्रेन) में होने वाला एक घातक ट्यूमर है जो जानलेवा हो सकता है। एक ताजा अध्ययन में शोधकर्ताओं ने ग्लियोमा की वृद्धि से जुड़े जैव संकेतकों का पता लगाया है जो इसकी पहचान और उपचार में मददगार हो सकते हैं।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जोधपुर और टाटा मेमोरियल अस्पताल, मुंबई के शोधकर्ताओं ने संयुक्त रूप एनएलआर समूह के जींस और उनसे संबंधित प्रतिरक्षा संकेतों की कार्यप्रणाली का अध्ययन किया और जैव संकेतक प्रोटीन एनएलआरपी 12 की पहचान की गई है। यह प्रोटीन प्रतिरक्षा संबंधी प्रतिक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह अध्ययन शोध पत्रिका साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित किया गया है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि तंत्रिका तंत्र में न्यूरॉन की सहायक ग्लियल कोशिका माइक्रोग्लिया में एनएलआरपी12 प्रोटीन की कमी से कोशिकाओं में असामान्य वृद्धि हो सकती है। जबकि, अध्ययन में एनएलआरपी12 की कमी वाली ग्लियोमा ट्यूमर कोशिकाओं का प्रसार कम देखा गया है।

ग्लियल कोशिकाएं तंत्रिका तंत्र में संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ मरम्मत में भी अपनी भूमिका निभाती हैं और इन कोशिकाओं में ही ग्लियोमा ट्यूमर बनता है। सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडियोग्राफी के बावजूद ग्लियोमा से पीडि़त मरीजों के जीवित बचने की दर कम होती है।

03 Jun 2020, 5:48 AM (GMT)

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